नई दिल्ली
विपक्षी बैठक की तारीख आखिरकार तय होती नजर आ रही है। नेताओं ने 23 जून को महामंथन का फैसला किया है, लेकिन अटकलें हैं कि कई विपक्षी दल कांग्रेस की भूमिका को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं। यहां तक कि कर्नाटक में कांग्रेस की जीत को विपक्षी एकता के लिए नुकसानदायक होने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, विपक्षी एकता की कवायद के बीच ऐसे कई मौके आए, जब अन्य दलों के सामने कांग्रेस को लेकर सवाल उठे।
जब राहुल ने उठाए थे क्षेत्रीय दलों पर सवाल
बीते साल दिसंबर में कांग्रेस नेता राहुल ने कह दिया था कि क्षेत्रीय दलों के पास राष्ट्रीय स्तर का नजरिया नहीं है। हालांकि, उस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर काम करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'हम बड़ी संख्या में विपक्षी दलों से अलग हैं। हम उनके साथ काम करते हैं, उनकी तारीफ करते हैं। हमारा मानना है कि वे जरूरी हैं, लेकिन हम अलग हैं। हम इसलिए अलग हैं, क्योंकि हम राष्ट्रीय विचारधारा की बात करते हैं।' मई 2022 में भी कांग्रेस ने दावा कर दिया था कि कांग्रेस के अलावा कोई दल भारतीय जनता पार्टी को नहीं हरा सकता। उन्होंने कहा था, '… भाजपा क्षेत्रीय दलों के बारे में बात नहीं करती। भाजपा जानती है कि क्षेत्रीय दल की अपनी जगह हो होती है, लेकिन वे विचारधारा की कमी के चलते भाजपा को नहीं हरा सकते। केवल कांग्रेस ही भाजपा का सामना कर सकती है। यह भारत के भविष्य की लड़ाई है।'
अब नीतीश को कराया इंतजार
सितंबर 2022 से मार्च 2023, यानी कांग्रेस को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विपक्षी एकता के प्रस्ताव को स्वीकारने में 7 महीने लग गए। खबरें थीं कि राहुल की विदेश यात्रा और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की व्यस्तता ने चलते 12 जून की बैठक टलने में भी भूमिका निभाई थी। हालांकि, तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके ने भी बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई थी और कहा जा रहा है कि कनिमोझी को प्रतिनिधि के तौर पर भेजने की तैयारी की थी।
विपक्ष की क्या राय
एक मीडिया रिपोर्ट में तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया गया कि कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की जीत विपक्षी एकता को नुकसान पहुंचा सकती है, क्योंकि इससे कांग्रेस में दोबारा अहंकार दोबारा आ सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक गतिविधियों पर लगातार टीएमसी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, जिसे रुकना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि 7 राज्यों सरकार में शामिल कांग्रेस के बगैर विपक्षी गठबंधन संभव नहीं है। उनका कहना है कि इसलिए सभी दलों को यह 'झेलना होगा।'
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