नई दिल्ली
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इस महीने होने वाला अमेरिका दौरा, इस दशक का सबसे बड़ा आर्थिक, राजनीतिक, जियो-पॉलिटिकल घटना माना जा रहा है। अमेरिकी मीडिया का कहना है, कि पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के बाद दुनिया एक नये जियो-पॉलिटिकल दिशा में मुड़ती दिखाई दे सकती है, क्योंकि भारत और अमेरिका, जो दुनिया की पहली और पांचवीं अर्थव्यवस्थाएं हैं, उनके बीच चीन को काउंटर करने के लिए कई ऐतिहासिक समझौते हो सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 जून को अमेरिका में होंगे और व्हाइट हाउस में उनके सम्मान में डिनर कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, लेकिन पीएम मोदी की यात्रा से पहले अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने भारतीयों को वीजा मिलने में देरी का मुद्दा उठाया है।
भारतीयों को क्यों मिलता है देरी से वीजा? अमेरिका के सांसदों ने भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार बताते हुए भारतीय लोगों को वीजा मिलने में अत्यधिक होने वाली देरी को हल करने का आग्रह किया है। सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष सीनेटर बॉब मेनेंडेज़ और हाउस इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष माइकल वाल्ट्ज ने कॉन्सुलर मामलों के बजट पर कांग्रेस की दो अलग-अलग सुनवाई के दौरान, विदेश विभाग के शीर्ष अधिकारियों से पूछा, कि भारत में लोग 'वीजा प्रतीक्षा समय' का सामना क्यों कर रहे हैं।
आपको बता दें, कि इस वक्त अमेरिका जाने के लिए भारतीय लोगों को वीजा हासिल करने में 600-600 दिनों का इंतजार करना पड़ता है। सीनेटर बॉब मेनेंडेज़ ने अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों से पूछा, कि "संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के साथ लोगों से लोगों के बीच मजबूत संबंधों का आनंद लेता है। भारत अब QUAD का हिस्सा है। हम इसे अपने भू-रणनीतिक हितों में लगातार शामिल कर रहे हैं। न्यू जर्सी बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिकियों और उनके परिवारों का घर है। मैं भारत में पहली बार बी1-बी2 वीजा आवेदकों के लिए प्रतीक्षा समय को कम करने के लिए विदेश विभाग ने जो ध्यान दिया है, मैं उसकी सराहना करता हूं।"
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