यूपी के इन 66 हजार टीचर्स को 7 साल में नहीं तीन महीने का बकाया; जानें पूरा मामला

उत्तर प्रदेश राज्य

प्रयागराज
 परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के तहत नियुक्त 66 हजार से अधिक शिक्षकों को सात साल में तीन महीने से अधिक समय का बकाया मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। जनवरी 2015 में चयनित प्रशिक्षु शिक्षकों को छह महीने का स्पेशल बीटीसी प्रशिक्षण कराना था। लेकिन चयनित अभ्यर्थियों को छह की बजाय नौ महीने से अधिक का प्रशिक्षण कराया गया।

बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रति माह 7300 रुपये के हिसाब से छह महीने प्रशिक्षण अवधि का मानदेय का भुगतान तो किया लेकिन शेष तीन महीने से अधिक अवधि का मानदेय नहीं मिला। भर्ती में चयनित 66 हजार से अधिक शिक्षकों के तीन महीने का मानदेय जोड़ा जाए तो 144 करोड़ से अधिक बनता है। शिक्षक कई बार आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत कर चुके हैं।

हर बार फाइल बेसिक शिक्षा निदेशक से सचिव बेसिक शिक्षा परिषद और फिर सचिव से निदेशक कार्यालय भेज दी जाती है। इस मामले में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े निर्भय सिंह ने 30 अप्रैल को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के पीजी पोर्टल पर शिकायत की है।

11 साल बाद भी बेरोजगारों को वापस नहीं मिले 290 करोड़

72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में ही एकेडमिक मेरिट भर्ती के लिए बेरोजगारों ने दिसंबर 2012 में आवेदन शुल्क के रूप में 290 करोड़ सरकार को दिए थे। एकेडमिक मेरिट से भर्ती न होने के कारण बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने कई बार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्यों से सूचनाएं तो मंगवाई, लेकिन आज तक रुपये वापस नहीं हो सके।

 

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