नई दिल्ली
केरल के तट पर मॉनसून एक सप्ताह की देरी से 8 जून को दस्तक दी है. देश के अन्य राज्यों में भी मॉनसून के पहुंचने में देर हो रही है. मौसम विभाग ने उत्तर भारत में 1 जूलाई तक मॉनसून के पहुंचने का अनुमान जताया है. मॉनसून में देरी का असर किसानों पर भी पड़ सकता है. सही समय पर बारिश नहीं होने के चलते किसानों धान की बुवाई और उसके उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा.
6 जुलाई तक कमजोर मॉनसून का पूर्वानूमान
प्राइवेट फोरकास्टिंग एजेंसी स्काईमेट वेदर (Skymet) ने देश में अगले चार हफ्तों में कमजोर मॉनसून की भविष्यवाणी की है. इससे फसलें प्रभावित होने की समस्या बढ़ गई है. स्काईमेट ने कहा कि कमजोर मॉनसून के 6 जुलाई तक रहने के आसार है. यही वो समय होता है, जब बुवाई की जाती है और आने वाली बारिश की उम्मीद में किसान अपने खेतों को तैयार करते हैं.
8 जुलाई को केरल पहुंचा था मॉनसून
स्काईमेट वेदर ने कहा कि भारत के मध्य और पश्चिमी हिस्से मौसम की शुरुआत में अपर्याप्त बारिश के कारण सूखे के प्रभाव से निपटने में चुनौतियों का सामना कर सकते हैं. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 1 जून की सामान्य तिथि के एक सप्ताह बाद यानी 8 जून को केरल पहुंचा था.
पिछले साल कमजोर मॉनसून के चलते किसानों को हुआ था नुकसान
बता दें कि पिछले बार भी कमजोर मॉनसून के चलते किसानों को काफी खामियाजा उठाना पड़ा था. धान की बुवाई में किसानों को देरी करनी पड़ी थी, जिसके चलते उसकी उपज में भी गिरावट दर्ज की गई थी. उत्तर प्रदेश के 62 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया था. बिहार और झारखंड के भी सभी जिलों को सूखे की मार झेलनी पड़ी थी. सरकार ने उस दौरान किसानों कम सिंचाई की जरूरत वाली फसलों की खेती करने की अपील की थी.
डराने वाला है स्काईमेट का पूर्वानूमान!
स्काईमेट का पूर्वानूमान डराने वाला है. अगर ऐसा हुआ तो लगातार दूसरे साल किसानों को धान की बुवाई के लिए तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है. उत्पादन गिरने का असर किसानों की आय पर पड़ेगा. वहीं, दूसरी तरफ धान की पैदावार कम होने से सरकार के स्टॉक पर भी असर पड़ सकता है.
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