नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने राष्ट्रीय राजधानी में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएचएम) पर स्पॉट लाइट रेड नाम से पहल की शुरुआत की है।
लड़कियों के स्कूलों में बीच में ही पढ़ाई छोड़ने से रोकने के मकसद से इस अभियान की शुरुआत की गई है। यह पहल शिक्षा के माध्यम से मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन की वकालत करने और प्रभावी मासिक धर्म नीतियों की वकालत करने पर केंद्रित है।
हाल ही में जारी शिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से यह मासिक धर्म के प्रबंधन और इसके सामाजिक प्रभाव के बारे में जागरूकता प्रदान करेगा। मॉड्यूल में पांच विषयगत क्षेत्र हैं, जिसमें विकलांग, लिंग, शिक्षक, युवा वयस्क और पोषण के साथ एमएचएचएम पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण शामिल किए गए हैं।
इस अभियान में सहयोगी पीएंडजी के उपाध्याक्ष गिरीश कल्याणरमन ने बताया कि इन टीचिंग-लर्निंग मॉड्यूल के जारी होने से शिक्षार्थियों, शिक्षकों, माहवारी और समुदाय के नेताओं को मासिक धर्म के प्रबंधन में व्यापक समझ और कौशल विकास के लिए अपरिहार्य संसाधन और रणनीतियां उपलब्ध होंगी, जबकि इसके सामाजिक प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि भारत में 5 में से 1 लड़की मासिक धर्म की शिक्षा की कमी और सैनिटरी उत्पादों तक पहुंच नहीं होने के कारण स्कूल छोड़ देती है। इस संबंध 71 प्रतिशत लड़कियां जागरूक नहीं है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीरियड्स पर बातें हों। हमारा उद्देश्य युवा लड़कियों को बिना किसी संकोच के अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करके अपने सपनों को हासिल करने के लिए सशक्त बनाना है और पीरियड्स के बारे में ज्ञान की कमी के कारण उन्हें स्कूल छोड़ने से रोकना है।
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