नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से दिल्ली तक ट्रेन से यात्रा करने वालों को अक्सर यह शिकायत रहती है कि उनका सफर देर से पूरा होता है। लेकिन अब ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्राइट कॉरिडोर के 27 किलोमीटर हिस्से के खुल जाने से दिल्ली-एनसीआर की ओर जाने वाले पैसेंजर ट्रेनों के लिए रूट काफी क्लियर हो जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अहरौरा और मुगल सराय (डीडीयू जंक्शन) के बीच शुरू हुए कॉरिडोर से यात्री ट्रेनों को भी काफी फायदा होगा। बिहार और यूपी से दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों की समयबद्धता बढ़कर 80-90 फीसदी हो जाएगी, जो अभी 45 फीसदी ही है। ईस्टर्न डीएफसी का नया हिस्सा 15 जून को खोला गया जोकि बिहार और गुजरात के बीच 1,875 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का हिस्सा है।
डेडिकेटेड फ्राइट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मुगलसराय, और पटना से दिल्ली आने वाली सभी ट्रेनें ज्यादा तेज दौड़ेंगी। कॉरिडोर को लॉन्च किए जाने के बाद प्रयागराज डिवीजन की समयबद्धता पहले ही 45% से बढ़कर 70 फीसदी हो चुकी है। दूसरे डिवीजन में भी आने वाले दिनों में सुधार होगा और यह लगभग 80-90 फीसदी तक जा सकता है।' नाम सार्वजनिक नहीं किए जाने की अपील करते हुए अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली, आनंद विहार स्टेशन और पुरानी दिल्ली जैसे स्टेशन तक चलने वाली ट्रेनों के समय में सुधार हो सकता है।
डीएफसीसीआईएल के मैनेजिंग डायरेक्टर आरके जैन ने कहा, 'हमने फ्राइट कॉरिडोर पर करीब 200-250 ट्रेनों को शिफ्ट किया है, जिससे पैसेंजर ट्रेनों के लिए रूट ज्यादा क्लियर होगा।' उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर को बनाने में सबसे बड़ा चैलेंज इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन के यार्ड से जोड़ना था। उन्होंने कहा, 'एशिया के सबसे बड़े रेलवे यार्ड डीडीयू से जोड़ना सबसे बड़ी बाधा थी क्योंकि मालवाहन ट्रेनें वहां अटक जाती थीं। अब डेडिकेटेड कॉरिडोर पर डायवर्जन से बड़ी मदद मिलने जा रही है।'
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