नई दिल्ली
कश्मीर के मुद्दे का जिक्र जब भी होता है, तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम जरूर आता है। वो उन लोगों में से थे, जिन्होंने सबसे पहले कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की मांग की। यही मांग उनकी मौत की वजह बनी। आज उनकी पुण्यतिथि है। बात करें निजी जीवन की तो डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को बंगाल में हुआ था। उनके पिता आशुतोष बाबू शिक्षाविद् थे। उन्होंने 22 साल की उम्र में एमए की परीक्षा पास की और उसी साल उनकी शादी करवा दी गई। इसके बाद उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया, जहां 24 साल की उम्र में वो कोलकाला विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य बने। फिर वो विदेश पढ़ाई के लिए गए और गणिय विषय पर अध्ययन किया।
पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने वकालत भी की, लेकिन उनकी किस्मत उनको कहीं और ले जा रही थी। 1939 में वो राजनीति में आ गए। उन्होंने समाज सुधार की दिशा में काफी काम किया। ऐसे में जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तो उनको गैर-कांग्रेसी मंत्री के रूप में नेहरू कैबिनेट में जगह मिली। उनको पहली बार में ही वित्त मंत्रालय का जिम्मा दे दिया गया। आजादी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल अलग-अलग रियासतों को मिला रहे थे, तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उनका साथ दिया। साथ ही हैदराबाद के विलय में अहम भूमिका निभाई।
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