महाराष्ट्र
महाराष्ट्र सदन घोटाले में छगन भुजबल की कथित संलिप्तता से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग में हसन मुश्रीफ की भूमिका तक, किरीट सोमैया ने इनके खिलाफ कई सबूत निकाले और मीडिया के सामने पेश किए थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि केंद्रीय एजेंसियां अलग-अलग विपक्षी नेताओं की गतिविधियों की जांच शुरू करें। लेकिन अब उन्ही नेताओं को मंत्री बना दिया गया है। ऐसे में किरीट सोमैया को शायद शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा हो।
'ये शिंदे-फडणवीस का फैसला है…'
छगन भुजबल और हसन मुश्रीफ के एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने पर किरीट सोमैया ने कहा, ''ये मुख्यमंत्री (शिंदे) और उपमुख्यमंत्री (फडणवीस) का फैसला है। यह अब उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। देखते हैं क्या होता है।''
दरअसल, भाजपा के सदस्य सोमैया को सांसद भावना गवली और बीएमसी की तत्कालीन स्थायी समिति के अध्यक्ष यशवंत जाधव से जुड़े घोटालों को उजागर करने पर ध्यान केंद्रित करने का श्रेय देते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि किरीट सोमैया को उद्धव ठाकरे सेना छोड़ने और भाजपा के साथ सरकार बनाने के लिए एकनाथ शिंदे से हाथ मिलाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
किरीट सोमैया ने मुश्रीफ के लिए जेल जाने की थी बात
हाल ही में एक वीडियो में किरीट सोमैया ने कहा था कि हसन मुश्रीफ जल्द ही जेल में होंगे। सोमैया ने एक वीडियो में मुश्रीफ को चेतावनी देते हुए कहा, "अदालतों ने रास्ता साफ कर दिया है और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) हसन मुश्रीफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है…अपना बैग लेकर तैयार रहें।"
NCP नेताओं पर अब भी चल रहे हैं केस
बता दें कि महाराष्ट्र की शिंदे सरकार में शामिल हुए एनसीपी नेताओं में अजित पवार समेत छगन भुजबल और हसन मुश्रीफ के खिलाफ फिलहाल ईडी की जांच चल रही है। अजीत पवार के खिलाफ कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में अभी जांच जारी है। हसन मुश्रीफ फिलहाल 11 जुलाई तक अंतरिम जमानत पर हैं। वहीं छगन भुजबल दो साल जेल में रहे हैं। फिलहाल अब वे जमानत पर हैं।
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