उज्जैन
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की पहली सवारी निकलेगी। इसे लेकर तैयारी की जा रही है। पेंटर रघु पाठक द्वारा शनिवार को भगवान महाकाल के मुखारविंद का शृंगार किया गया। पालकी की साफ-सफाई कर इसे राजा की सवारी के लिए तैयार किया जा रहा है।
मनमहेश और चंद्रमौलेश्वर रूप का शृंगार
श्रावण-भादौ मास की सवारी में निकलने वाले भगवान महाकाल के मुखारविंद का शृंगार तीन पीढ़ियों से शहर का पाठक परिवार करता आ रहा है। स्व. चंद्रकांत पाठक के बाद उनके पुत्र रघु पेंटर डेढ़ दशक से भगवान का शृंगार कर रहे हैं। उनका सहयोग तीसरी पीढ़ी के निखिल पाठक करते हैं। शनिवार को रघु पेंटर ने भगवान महाकाल के मनमहेश व चंद्रमौलेश्वर रूप का शृंगार किया।
चांदी की पालकी में पालिश
इधर मंदिर के म्यूजियम में रखी चांदी की पालकी का संधारण तथा इसकी पालिश का काम भी शुरू हो गया है। सोमवार को इसी पालकी में विराजित होकर अवंतिकानाथ भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। जिला व मंदिर प्रशासन द्वारा भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।
नौ भजन मंडलियां होंगी शामिल
प्रशासक संदीप कुमार सोनी ने बताया कि मंदिर के जिस मुख्य द्वार से राजाधिराज महाकाल की पालकी नगर भ्रमण के लिए निकलेगी, उसकी सीढ़ियों पर पत्थर लगाने का अधिकांश काम रविवार शाम तक पूरा कर लिया जाएगा। केवल पारंपरिक नौ भजन मंडलियां व झांझ डमरू दल को कारवां में शामिल किया जाएगा। किसी भी नए मंडल को शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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