भोपाल
प्रदेश में कारपोरेट अस्पतालों की तर्ज पर अब सरकारी अस्पतालों में अब असिस्टेंट मैनेजर नियुक्त होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने इन मैनेजरों के पद को कॉडर कैटेगरी में डालने के बाद इनके कार्य दायित्व भी तय कर दिए हैं। ये असिस्टेंट मैनेजर अस्पताल की व्यवस्थाओं के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होंगे। सरकार ने इन्हें मरीजों को दी जाने वाली सुविधा से लेकर अन्य व्यवस्थाओं अस्पताल में उपलब्ध मशीनों और जांच समेत अन्य सभी सुविधाओं का जिम्मा भी सौंपा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सहायक प्रबंधक (असिस्टेंट मैनेजर) के लिए जो जिम्मेदारियां तय की हैं, उसके अंतर्गत मरीज की सुरक्षा और संतुष्टि को प्राथमिकता देते हुए उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल और सेवाओं का ध्यान इन्हें रखना होगा। रोगी की शिकायत और उसकी प्रतिक्रिया का समाधान करने के साथ अस्पताल के आपरेशन थियेटर, समस्त अस्पताल परिसर में रोज विजिट करने के साथ रखरखाव और साफ सफाई का जिम्मा इन्हीं के पास रहेगा।
आदेश में कहा गया है कि शासन और उच्च अधिकारियों द्वारा अस्पतालों का निरीक्षण किए जाने के पूर्व इंस्पेक्शन, क्वालिटी सर्टिफिकेट, कायाकल्प, नाएबीएच आदि क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम की तैयारियों में भी इन्हें लगना होगा। अस्पताल के लिए जरूरी लाइसेंस दिलाने के लिए भी सहायक प्रबंधक को काम करना होगा।
सीएमएचओ, सीएस के निर्देश पर करेंगे काम
इसको लेकर जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि सहायक प्रबंधक संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं की अस्पताल प्रशासन शाखा के दायरे में काम करने की जिम्मेदारी रहेगी। इसके अंतर्गत सीएमएचओ, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, आरएमओ, सिविल अस्पताल प्रभारी के निर्देशन में सौंपे गए कामों को इन्हें पूरा करना होगा।
इन्हें अस्पताल में मौजूद सभी प्रकार की मशीनों, चिकित्सा उपकरणों, पलंग, कुर्सी टेबल का व्यवस्थित रखरखाव, मरम्मत के लिए सर्विस प्रोवाइडर से काम कराना और गैर मरम्मत योग्य उपकरणों का डेटा तैयार कर अस्पताल प्रभारी को सूचना देकर विनष्टीकरण कराना होगा। अस्पताल की प्रगति की मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने के साथ अस्पताल प्रबंधक और मरीजों के इलाज की व्यवस्था सुदृढ़ करना भी सहायक प्रबंधकों की ही जिम्मेदारी होगी।
कर्मचारियों, चिकित्सकों की भी जिम्मेदारी
अस्पताल में काम करने वाले तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की देखरेख और उनकी ड्यूटी पर उपलब्धता के साथ आउटसोर्स एक्टिविटीज, हाउस कीपिंग, रसोई घर, एसएसडी सुरक्षा, लांड्री, बायो मेडिकल वेस्ट का इंस्पेक्शन, प्रभारी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कार्यालयीन कर्मचारियों को मरीजों की सुविधा के मुताबिक काम में लगाने की जिम्मेदारी भी इन्हें सौंपी गई है।
अस्पतालों में सहायक प्रबंधक व्यवस्था बनाने का काम किया गया है। अब इनको कॉडर श्रेणी में लाकर इनके द्वारा किए जाने वाले काम भी तय कर दिए गए हैं। सहायक प्रबंधक बनने वाले नॉन मेडिकल स्टाफ होंगे। इनके समकक्ष योग्यता रखने वाले डॉक्टर्स भी इसके लिए अप्लाई कर सकेंगे।
डॉ सुदाम खाड़े, आयुक्त, स्वास्थ्य विभाग
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