लखनऊ
यूपी में नए उद्योग, प्रतिष्ठान और घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या में हो रही वृद्धि से बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले चालू वित्तीय वर्ष में अब तक प्रतिदिन की बिजली खपत में 5.38 करोड़ यूनिट का इजाफा हो चुका है।
पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य में प्रतिदिन औसत बिजली की खपत 38.96 करोड़ यूनिट प्रतिदिन थी जो कि अब बढ़कर 44.34 करोड़ यूनिट प्रतिदिन हो गई है। इस बढ़ती खपत के सापेक्ष राज्य के पास कुल खपत का मुश्किल से 30 फीसदी ही अपनी बिजली है। शेष के लिए राज्य केंद्रीय सेक्टर और निजी बिजली उत्पादक घरानों पर निर्भरता है।
राज्य के पास कुल 7682 मेगावाट अपनी बिजली है। जून 2024 तक पांच नई परियोजनाओं के चालू हो जाने पर इसमें 4983 मेगावाट की वृद्धि हो जाएगी। नई परियोजनाओ के चालू होने के बाद भी राज्य को एनटीपीसी और निजी घरानों से अनुबंध के आधार पर मिलने वाली बिजली की भरपूर जरूरत बनी रहेगी। स्थानीय व्यवधानों से बिजली कटने पर अंकुश लगने और लो-वोल्टेड जैसी दिक्कतें पूरी तरह समाप्त होने पर खपत में 10-15 फीसदी तक और वृद्धि संभव है।
एक दशक में लोगों की बिजली उपभोग की क्षमता दोगुनी बढ़ी
प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पिछले एक दशक में लोगों की बदलती जीवनशैली से जोड़ कर देखा जा रहा है। पहले जहां सिर्फ पंखे से लोगों का काम चल जाता था, अब कूलर और एसी का प्रयोग बहुत बढ़ गया है। टीवी, फ्रीज और अन्य इलेक्ट्रिक व इलेक्ट्रानिक उपकरणों का प्रयोग बहुतायत में होने लगा है।
इसके अलावा नए उद्योग, दुकानों, सरकारी व निजी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में एसी, रूम हीटर आदि का प्रयोग बढ़ना भी प्रमुख कारण है। एक दशक पूर्व 2012-13 में राज्य में प्रतिदिन बिजली की औसत खपत महज 20.98 करोड़ यूनिट प्रतिदिन की थी जो कि अब बढ़कर दोगुने से अधिक हो गई है।
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