हैदराबाद
खेतों में मजदूर के तौर पर काम करने से लेकर PhD हासिल करने का सफर आसान तो नहीं हो सकता। वो भी केमिस्ट्री जैसे जटिल विषय में, जहां पूरा दिन पढ़ने के बाद भी छात्र कई बातों पर कन्फ्यूज नजर आते हैं। आंध्र प्रदेश की साके भारती के लिए भी यह काम मुश्किल ही था। साथ ही उनकी लगन और हौसले ने इस सफर को आसान तो नहीं किया, लेकिन नामुमकिन भी नहीं होने दिया। अब वह शान से अपने नाम के आगे DR. लिखने की तैयारी कर रही हैं।
एक नहीं थी मुश्किलें, दिक्कतों का पहाड़ खड़ा था
पढ़ने के लिए बेहद सीमित संसाधन, आर्थिक परेशानियां, घर की सबसे बड़ी बेटी और उसे जुड़ी जिम्मेदारियां जैसी कई चुनौतियों से भारती को पार पाना था। लेकिन उन्होंने तो पढ़ाई का फैसला कर लिया था। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने खेत में मजदूर के तौर पर काम करना शुरू किया। इसी बीच उनकी शादी भी हो गई, लेकिन भारती के लिए जिंदगी का यह मोड़ भी राहत लेकर आया। पति ने भारती का जमकर साथ दिया।
यहां से शुरू हुई सफलता की कहानी
पढ़ाई की ललक उन्हें श्री कृष्ण देवराज यूनिवर्सिटी ले आई। यहां उन्होंने PhD में दाखिला लिया। अब उनके सामने चुनौतियों के नाम पर एक मां, पत्नी जैसी भूमिकाएं भी थीं। सभी को साथ लेकर भारती ने केमिस्ट्री में रिसर्च शुरू की। हालांकि, पूरे समय राह की मुश्किलों को धता बताकर उन्होंने किताबों में मन लगाया और PhD का अंतिम पढ़ाव भी पार कर लिया।
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