कानपुर
कानपुर में जीएसटी अधिकारी गाड़ी रोकते ही बगैर कुछ कहे थप्पड़ जड़ दिए जाते हैं। मोबाइल तक छीन लिया जाता है, जबकि मोबाइल छीनने व बंद नहीं कराने का आदेश है। मानसिक व शाराीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। जीएसटी अफसर नहीं इनको अपराधियों का गैंग कहिए…। गुस्से भरे यह अल्फाज ट्रांसपोर्टरों के हैं। पंजाब के ड्राइवर बलबीर की मौत से उपजा आक्रोश थम नहीं रहा है। ट्रांसपोर्टर और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
चोरी-डकैती नहीं कारोबार कर रहे
यूपी युवा मोटर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के संरक्षक श्याम शुक्ला का कहना है कि हम कारोबार कर रहे हैं। कोई चोरी-डकैती नहीं कर रहे हैं, फिर जीएसटी अफसर अपराधियों जैसा सलूक क्यों करते हैं। टैक्स देने के बाद भी वसूली की जाती है। शासन को इस मामले में कड़े कदम उठाने चाहिए।
डीएम का आदेश भी नहीं मानते अफसर
ट्रांसपोर्टर अतुल शर्मा कहते हैं कि डीएम ने व्यापार बंधु की बैठक में कई बार निर्देश दिया कि गाड़ी पकड़ने से लेकर नोटिस देने तक सारी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी। इसके बाद भी जीएसटी अफसर आदेश मानने को तैयार नहीं है। सचल दल के प्रभारी का नंबर तक नहीं लवी गांधी, आदित्य तिवारी, शफीक अहमद ने बताया कि कई मांग के बाद भी सचल दल की गाड़ियों में प्रभारी का पद व मोबाइल नंबर अंकित नहीं किया जा रहा है।
जांच के नाम पर खर्च भी वसूल रहे
यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अजय कपूर का आरोप है कि गाड़ी को पकड़ने के बाद जांच प्रक्रिया के नाम पर भी वसूली की जाती है। माल उतारने से लेकर माप-तौल व दोबारा गाड़ी में चढ़ाने के साथ लेबर खर्च के नाम पर रुपये व्यापारी व ड्राइवर से ही लिया जाता है।
तुरंत माप-तौल के बावजूद इंतजार
यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री मनीष कटारिया तुरंत माप-तौल नहीं कराने पर उग्र हैं। कहते हैं कि तुरंत जब्त माल की माप-तौल करनी चाहिए, इसके बावजूद चार से पांच दिन तक गाड़ी व ड्राइवर को परेशान किया जाता है। यही पंजाब के ड्राइवर के साथ भी हुआ।
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