नईदिल्ली
विधानसभा में नेता विपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने विधानसभा सत्र के दौरान डीटीसी बसों की खराब हालत का आरोप लगाया। उन्होंने डीटीसी के रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि डीटीसी के बेड़े में 3504 बसें हैं। सभी बसें अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। आए दिन इन बसों में आग लगती है, इससे बसों में सफर करने वाले यात्रियों की जान खतरे में है।
बिधूड़ी ने कहा कि आठ साल में दिल्ली सरकार ने एक भी सीएनजी बस नहीं खरीदी है। डीटीसी का घाटा भी 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया है। डीटीसी की आर्थिक हालत ऐसी है कि 21 हजार रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन देने तक के पैसे नहीं हैं। डीटीसी के रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन कई महीनों से बकाया है। चार महीने की बकाया पेंशन जून में दी गई थी। सीएम ने डीटीसी के अस्थायी कर्मचारियों से वादा किया था कि उन्हें स्थायी किया जाएगा। लेकिन, आज तक कर्मचारी परमानेंट नहीं हो पाए हैं।
विधानसभा में नेता विपक्ष बिधूड़ी ने पानी को लेकर भी दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि साल 2014 में जलबोर्ड जब 500 करोड़ रुपये के मुनाफे में था, तो अचानक 72 हजार करोड़ रुपये घाटे में कैसे आ गया। यमुना के सफाई के लिए केंद्र ने जो 8500 करोड़ रुपये दिए हैं, सरकार उसका भी हिसाब नहीं दे रही है। जलबोर्ड ने पानी की क्वॉलिटी की जांच के लिए 7500 सैंपल उठाए, जिसमें से 2500 सैंपल फेल हो गए। जिन राज्यों से पानी के लिए सरकार ने करार किया था, आखिर उन राज्यों से अबतक पानी क्यों नहीं मिल रहे हैं? बीजेपी के बाकी विधायकों ने भी पानी के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को विधानसभा सत्र के दौरान घेरने की कोशिश की।
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