बेंगलुरु
मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) में व्याख्यान देने से रोका गया क्योंकि प्रशासन ने अंतिम समय में बैठक रद्द कर दी थी।
जानकारी के मुताबिक, 'ब्रेक द साइलेंस' नामक समूह ने बुधवार शाम को आईआईएससी परिसर में कार्यक्रम का आयोजन किया था और यह कार्यक्रम सीसीई व्याख्यान सभागार में होना था।
सीतलवाड़ ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि अधिकारियों ने उन्हें सभागार में प्रवेश की अनुमति देने से अंतिम समय में इनकार कर दिया, जिसके कारण उन्हें आईआईएससी भोजनालय के बाहर बगीचे में बैठक करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कहा कि आईआईएससी परिसर में 40 से अधिक प्रोफेसर और छात्र व्याख्यान में शामिल हुए।
उन्होंने कहा, ''मुझे बेंगलुरु के प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान में कल बहुत ही अजीब अनुभव हुआ। कुछ प्रोफेसर और छात्रों ने मुझे सीसीई हॉल में 'सांप्रदायिक सद्भाव और न्याय' विषय पर एक व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया था और मुझे लगता है कि प्रशासन ने बैठक रद्द करने का फैसला आखिरी मिनट में लिया।''
सीतलवाड़ ने कहा कि आईआईएससी प्रशासन ने उन्हें संस्थान के द्वार में प्रवेश करने से रोकने की भी कोशिश की।
उन्होंने कहा कि बहरहाल, 40 से अधिक छात्र और प्रोफेसर कैंटीन के बाहर बगीचे में बैठे और उन्होंने ''न्याय, शांति, भारत जिस महत्वपूर्ण मोड़ पर है, उस पर और असहमति, सांप्रदायिक सद्भाव एवं शांति के लिए बोलने की आवश्यकता'' पर गहन चर्चा की।
सीतलवाड़ ने कहा, ''21वीं सदी के आधुनिक भारत में सांप्रदायिक सद्भाव एवं शांति वर्जित शब्द नहीं हो सकते।''
कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि सीतलवाड़ ने भारत में सांप्रदायिक दंगों और ''मुसलमानों एवं असहमति जताने वालों के उत्पीड़न'' पर बात की।
आईआईएससी के अधिकारियों से इस मामले में अभी प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
उच्चतम न्यायालय ने 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों से जुड़े मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के सिलसिले में सीतलवाड़ को पिछले महीने नियमित जमानत दे दी थी।
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