नई दिल्ली
क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने एक बड़ा ऐलान किया है। साउथ अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड ने महिला क्रिकेट टीम की मैच फीस को पुरुष क्रिकेट टीम की मैच फीस के बराबर करने का फैसला किया है। इस तरह साउथ अफ्रीका तीसरा देश होगा, जहां मेंस और वुमेंस टीम की खिलाड़ियों को एकसमान मैच फीस मिलेगी। सीएसए से पहले न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने ऐसा किया हुआ है। वहीं, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया एकमात्र बोर्ड है, जिसने अपने बेसिस सालाना कॉन्ट्रैक्ट को एकसमान रखा है।
इतना ही नहीं, साउथ अफ्रीका में घरेलू महिला क्रिकेट को भी प्रोफेशनल किए जाने का ऐलान किया गया है। एकसमान मैच फीस के ये बदलाव कराची में पाकिस्तान के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका की वनडे और टी20 सीरीज से लागू किए जाएंगे, जो 1 सितंबर से शुरू होगी। इसके अलावा 2023/24 सीजन में वुमेंस लीग भी हो सकती है। इस फैसले से अगले तीन वर्षों में सीएसए के बिलों में 2.13m USA डॉलर की राशि बढ़ेगी, जिसमें से 7 लाख 99000 US डॉलर का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा।
मौजूदा 16 महिला प्रांतीय टीमों में से छह का शीर्ष डिवीजन प्रोफेशनल लीग बनाई जाएगी, जिसमें सफेद गेंद के दोनों प्रारूपों में प्रतियोगिताएं होंगी, जिसमें विजेताओं के लिए पुरस्कार राशि भी होगी। टीमें – लायंस, टाइटन्स, वेस्टर्न प्रोविंस, डॉलफिन, फ्री स्टेट और गार्डन रूट बेजर्स – मौजूदा छह से बढ़ाकर प्रत्येक 11 खिलाड़ियों को अनुबंधित करने में सक्षम होंगी। वेतन पुरुषों के खेल के दूसरे डिवीजन में सबसे अच्छे वेतन पाने वाले खिलाड़ियों के बराबर होगा। सहयोगी स्टाफ में आधी महिलाएं होंगी।
दक्षिण अफ्रीका में किसी अन्य खेल में महिलाओं को समानता का वह स्तर प्रदान नहीं कर पाएगा, जिसका क्रिकेट ने वादा किया है। दरअसल, देश में कोई भी अन्य प्रोफेशनल स्पोर्ट्स नहीं हैं, जिसमें महिलाओं के लिए इतना किया जा रहा हो। खेल मंत्री जिजी कोडवा भी इससे खुश हैं। उन्होंने कहा, "आज हम जो जश्न मना रहे हैं वह मौद्रिक मूल्य के बारे में नहीं, बल्कि नेतृत्व और राजनीतिक इच्छाशक्ति के बारे में है।" साउथ अफ्रीका की महिला टीम ने पिछले कुछ समय में अच्छा प्रदर्शन किया है।
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