फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट के आधार पर कैसे दर्ज कर सकते हैं FIR, एससी का EGI मामले पर मणिपुर सरकार से सवाल

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) की ओर से मणिपुर हिंसा पर तैयार की गई फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट को लेकर आपराधिक मामला दर्ज करने पर सवाल उठाया। खासतौर से यह देखते हुए कि रिपोर्ट उनकी व्यक्तिपरक राय पर आधारित थी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी। यह याचिका ईजीआई अध्यक्ष सीमा मुस्तफा और पिछले महीने राज्य का दौरा करने वाली तीन सदस्यीय टीम की ओर से दायर की गई थी। साथ ही बेंच ने बॉडी को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की अनुमति देने के लिए राज्य से जवाब मांगा, ताकि उनके खिलाफ मणिपुर में दर्ज 2 आपराधिक मामलों को रद्द किया जा सके। एससी की इस पीठ में सीजेआई के साथ ही जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। बेंच ने कहा, 'आखिरकार यह एक रिपोर्ट ही तो है। क्या यह किसी आपराधिक मामले का मैटर हो सकता है? अधिक से अधिक यह व्यक्तिगत राय ही है। यह ऐसा मामला नहीं है जहां किसी व्यक्ति पर ग्राउंड पर कोई गतिविधि करने का आरोप लगा हो।' वहीं, राज्य ने हलफनामा दायर करके कहा है कि FIR के खिलाफ याचिका मणिपुर हाई कोर्ट में दायर की जानी चाहिए। यह पूरी तरह सें फंक्शनल है और जहां उपस्थित होने का प्रावधान है।

ईजीआई टीम पर तनाव फैलाने का आरोप
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, 'हम FIR रद्द नहीं कर रहे हैं, लेकिन इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या हमें उन्हें मणिपुर हाई कोर्ट या दिल्ली HC जाने के लिए कहना चाहिए।' बता दें कि ईजीआई की ओर से फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट पब्लिश करने के एक दिन बाद 3 सितंबर को FIR दर्ज की गई थी। इंफाल और पोरोम्पैट पुलिस स्टेशनों में ये शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें EGI और उसकी टीम पर शत्रुता को बढ़ावा देने, राज्य में सांप्रदायिक तनाव फैलाने और मैतेई समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाया गया था।

EGI ने रिपोर्ट में उठाए थे गंभीर सवाल
जातीय हिंसा पर मीडिया रिपोर्टिंग का अध्ययन करने के लिए EGI ने 7 से 10 अगस्त के बीच राज्य का दौरा किया। 'एडिटर्स गिल्ड' ने 2 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में मणिपुर में इंटरनेट प्रतिबंध को मीडिया रिपोर्टिंग के लिए नुकसानदेह बताया था। साथ ही मीडिया कवरेज की आलोचना की गई थी। गिल्ड ने दावा किया था कि मणिपुर में जातीय हिंसा पर मीडिया में आईं खबरें एकतरफा हैं। इसके साथ ही उसने संघर्ष के दौरान राज्य नेतृत्व पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया था। मुख्यमंत्री ने कहा था, 'वे राज्य विरोधी, राष्ट्र विरोधी और सत्ता विरोधी (लोग) हैं जो जहर उगलने आए थे। अगर मुझे पहले पता होता तो मैं उन्हें प्रवेश की ही इजाजत नहीं देता।'

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