विशेष सत्र में पांच दिन शेष, लेकिन एजेंडे की जानकारी नहीं : कांग्रेस

राजनीती

नई दिल्ली
 कांग्रेस ने संसद के विशेष सत्र के लिए एजेंडे की सूचना नहीं होने को लेकर बुधवार को एक बार फिर सवाल उठाया और कहा कि सत्र आरंभ होने में केवल पांच दिन शेष है, लेकिन शायद 'एक व्यक्ति' को छोड़कर एजेंडे के बारे में किसी के पास जानकारी नहीं है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने अतीत में हुई संसद की कुछ विशेष बैठकों का उल्लेख भी किया और कहा कि विशेष बैठकों से पहले कार्यसूची की जानकारी उपलब्ध होती थी।

उन्होंने किसी का नाम लिए बिना 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''आज 13 सितंबर है। संसद का पांच दिवसीय विशेष सत्र पांच दिन बाद शुरू होगा और एक व्यक्ति (शायद दूसरे को भी) को छोड़कर किसी को भी एजेंडे की जानकारी नहीं है। पिछले प्रत्येक अवसर पर जब भी विशेष सत्र या विशेष बैठकें आयोजित की जाती थीं, तो कार्यसूची के बारे में पहले से जानकारी होती थी।'' संसद का विशेष सत्र 18 से 22 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा।

रमेश ने कहा, ''26 नवंबर, 2019 को संविधान की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में केंद्रीय कक्ष में विशेष बैठक हुई। 30 जून, 2017 को जीएसटी लागू करने के लिए आधी रात को केंद्रीय कक्ष में संयुक्त विशेष सत्र हुआ। 26 और 27 नवंबर, 2015 को संविधान दिवस मनाने के लिए विशेष बैठक आयोजित हुई।''

उनके अनुसार, ''13 मई, 2012 को राज्यसभा और लोकसभा की पहली बैठक की 60वीं वर्षगांठ मनाने के लिए विशेष बैठक हुई। 22 जुलाई, 2008 को वाम दलों द्वारा संप्रग-1 सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद विश्वास मत के लिए लोकसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया।''

कांग्रेस नेता ने कहा कि 26 अगस्त, 1997 से 1 सितंबर, 1997 तक भारतीय स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ मनाने के लिए विशेष सत्र हुआ। 3 जून, 1991 से 4 जून, 1991 तक अनुच्छेद 356(3) के प्रावधान के तहत हरियाणा में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी के लिए राज्यसभा का विशेष सत्र (158वां सत्र) आयोजित हुआ।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार 28 फरवरी, 1977 से 1 मार्च, 1977 तक अनुच्छेद 356(4) के तहत तमिलनाडु और नगालैंड में राष्ट्रपति शासन का समय बढ़ाए जाने के लिए भी राज्यसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया था।

 

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