नईदिल्ली
ऐसे समय पर जब संसद में महिला आरक्षण बिल पास करते हुए विपक्षी पार्टियों ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिलाओं के लिए कोटे की मांग की और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नौकरशाही उनकी कम भागीदारी का मुद्दा जोरशोर से उठाया, दिल्ली में 4680 पद खाली पाए गए हैं जो ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की ओर से 13-15 सितंबर के बीच की गई समीक्षा में यह पाया गया है।
रिपोर्ट में आयोग के अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर की ओर से कहा गया, 'हमने समीक्षा की और चीफ सेक्रेट्री नरेश कुमार समेत सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने स्वीकार किया कि नियुक्तियां लंबित हैं और ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों को भरा नहीं गया है।' समीक्षा में पाया गया कि ओबीसी के रिक्त पदों में 310 ग्रुप ए के हैं, जबकि 1903 ग्रुप बी और 2467 ग्रुप सी के हैं।
आयोग ने दिल्ली के चीफ सेक्रेट्री को इन पदों को भरने के लिए कहा है। दिल्ली सरकार को इस प्रक्रिया को पूरी करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है। ग्रुप ए के पद वरिष्ठ स्तर के हैं, जिनमें सेक्रेट्री, आईएएस और DANICS के अधिकारी शामिल हैं। बीजेपी ओबीसी मोर्चा और ओबीसी महासंघ की तरफ से शिकायत के बाद एनसीबीसी ने यह समीक्षा की और खाली पदों को भरने का निर्देश दिया। सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 पर्सेंट आरक्षण है।
अहीर ने कहा कि समीक्षा से यह भी सामने आया कि दिल्ली सरकार ठेके पर नियुक्ति में ओबीसी आरक्षण के नियम का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, 'ठेके पर नियुक्ति यदि 45 दिन या इससे अधिक के लिए होती है तो सरकार 27 फीसदी आरक्षण नीति को अपनाने के लिए बाध्य है। हमने पाया कि दिल्ली सरकार इस नियम का भी पालन नहीं कर रही है। एनसीबीसी ने इसको लेकर भी दिल्ली सरकार से नाराजगी जाहिर की और आरक्षण नियम को लागू करने को कहा।
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