ग्वालियर
मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में काम करने वाले करीब ढाई लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को श्रम विभाग के आदेश से झटका लग गया है। श्रम विभाग ने आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन में 85 से लेकर 175 रुपए की बढ़ोत्तरी की है। इस बेहद मामूली बढ़ोत्तरी से आउटसोर्स कर्मचारी खफा हो गए हंै।
असल में श्रम विभाग पर लगातार इस बात का दबाव था कि न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत कर्मचारियों के वेतन को रिवाइज किया जाए। इस पर मप्र शासन के श्रम विभाग ने आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन को रिवाइज कर आदेश जारी कर दिए, लेकिन यह वेतन बढ़ोत्तरी बेहद मामूली रही। जबकि माना जा रहा था कि वेतन में लगभग 5 हजार रुपए की बढ़ोत्तरी होगी। श्रम विभाग के इस फैसले से नाखुश आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन अब एक जुट होकर बडेÞ आंदोलन की तैयारी कर रहे है।
न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 का हवाला देते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन मात्र 85 से 175 रुपए बढ़ाया गया है जो अत्यंत हास्यास्पद है। सरकार के द्वारा चुनावी समय में जहां एक तरफ रोजगार सहायकों, आगावड़ी कार्यकतार्ओं, एवं अन्य विभाग के श्रमिकों को वर्तमान वेतन का दो गुना करते हुए आदेश जारी किया गया। वहीं विद्युत एवं अन्य विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों को बार-बार अनुरोध करने के बाद भी ये मामूली वृद्धि बेहद निराशा जनक है। हम सभी संगठन इस आदेश के खिलाफ एक जुट हो रहे है। दो अक्टूबर को भोपाल में भी धरना प्रर्दाशन किया जाएगा।
एल के दुबे, प्रदेश अध्यक्ष, मप्र संविदा एवं ठेका श्रमिक कर्मचारी संघ इंटक
सरकार का यह आदेश आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ धोखा है। आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन निर्धारण वर्तमान महंगाई के अनुरूप एवं वास्तविक न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 का पालन करते हुए किया जाना था जो नहीं किया गया।
विद्याकांत मिश्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश संविदा ठेका श्रमिक
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