जयपुर.
'अनुज वधु भगिनी सत नारी, सुनु सठ कन्या सम ऐ चारी, इन्हहि कुदृष्टि बिलोकई जोई, ताहि वध कछु पाप न होई' ये चौपाई रामचरित मानस के उस प्रसंग की है, जब मरते समय बाली ने भगवान श्रीराम से उसका बध करने का कारण पूछा? इसके बाद श्रीराम ने अपनी बात इस चौपाई के जरिए रखी थी। कोटा में पॉक्सो कोर्ट ने बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्र कैद की सजा सुनाते हुए इस चौपाई को फैसले में लिखा।
दरिंदे पिता ने पांच साल तक नाबालिग बेटी को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया था। कोर्ट ने फैसले में जो चौपाई लिखी उसका मतलब है- छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्र की पत्नी, और पुत्री में कोई अंतर नहीं है। किसी भी पुरुष के लिए ये समान होनी चाहिए। इन पर कुदृष्टि रखने वाले या अपमान करने वाले का वध करना पाप की श्रेणी में नहीं आता है।
जानिए, क्या है मामला?
दरअसल, दोषी पिता 14 साल की उम्र से बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा था। लेकिन, डर के कारण बेटी ने घटना की जानकारी किसी को नहीं थी। 19 दिसंबर 2022 की शाम पीड़िता घर में अकेली थी। इस दौरान आरोपी ने बेटी को पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मां के बाजार से लौटने के बाद पीड़िता ने घटना की जानकारी दी। इस पर पीड़िता की मां और आरोपी पिता के बीच लड़ाई हुई। आरोपी पिता ने माफी मांगते हुए दोबारा ऐसी गलती नहीं करने की बात कही। लोक-लाज के डर से पुलिस को शिकायत नहीं दी गई। लेकिन, तीन महीने बाद पीड़ित बेटी ने साहस दिखाया। 9 मार्च 2023 को उसने उधोग नगर थाने में आरोपी पिता के खिलाफ केस दर्ज कराया। इस दौरान वह बालिग हो गई थी।
पुलिस ने जांच कर जुटाए सबूत
केस दर्ज करने के बाद उधोग नगर थाना पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कराया। उधर, पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 11 गवाह और 18 दस्तावेज पेश किए। सात महीने चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने गुरुवार को आरोपी को अंतिम सांस तक के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार का जुर्माना भी लगाया।
कोर्ट ने फैसले में क्या लिखा?
कोर्ट ने दोषी पिता को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ फैसले में रामचरित मानस की चौपाई लिखी। इसके अलावा कोर्ट ने फैसले में लिखा- अच्छी परवरिश और संस्कार मिलने के कारण बेटी ने राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भाग लिया। नाबालिग अवस्था से बालिग अवस्था तक शारीरिक संबंध बनाना मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। संभवतया इस प्रकार का उदाहरण दानवों में भी नहीं पाया जाता। समय परिवर्तनशील है लेकिन, बेटी की कटु स्मृतियां सम्भवतः कभी नहीं मिटेंगी। लेकि, आरोपी आखिरी सांस तक जेल में बैठकर अपने पापों का प्रायश्चित करता रहेगा। इसी के साथ कोर्ट ने पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी अनुशंसा की है।
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