जैसलमेर.
रामदेवरा थाना क्षेत्र के छायण गांव में आज एसएसबी में कार्यरत एक जवान का बीमारी से निधन हो गया। शव को गांव लाने के बाद आज जवान के परिजनों ने शव नहीं उठाया और विरोध किया। छायण गांव के भंवर सिंह भाटी लंबे समय से बीमार थे और दिल्ली में एसएसबी में कार्यरत थे। परिजनों ने बताया कि पोस्टिंग के दौरान उनको कैंसर हो गया गया था, लेकिन बीमारी के बाद भी उनकी पोस्टिंग असम में कर दी गई और उन पर सैनिक क्वार्टर भी खाली करने का दबाव बनाया गया।
इसी बीमारी के दौरान उनकी मौत हो गई। आज उनका शव उनके पैतृक गांव छायण लाया गया, जहां जवान के परिजनों ने शव उठाने से मना कर दिया। परिजनों के विरोध के बाद रामदेवरा पुलिस और बीएसएफ के अधिकारियों ने समझाइश की कोशिश की, लेकिन अभी तक परिजनों ने शव को नहीं उठाया है। परिजनों के अनुसार एसएसबी के जवान भंवर सिंह का दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा था और विभाग ने उनकी इस बीमारी के दौरान ही पोस्टिंग असम में कर दी। बीमारी के कारण वो क्वार्टर खाली नहीं कर पाए और बीमारी के कारण वो मानसिक तनाव में रहते थे। ज्यादा दबाव के चलते अभी 20 दिन पहले ही उन्होंने क्वार्टर किया था। उसके बाद भी विभाग ने क्वार्टर के किराए का नोटिस दे दिया और उनकी सैलरी में से किराए को वसूलने की बात बोली।
अब छायण गांव में ग्रामीण और सैनिक के परिजन शव के साथ विरोध कर रहे हैं। परिजनों की मांग है कि क्वार्टर का किराया 22 लाख रुपये विभाग वहन करें। परिवार के एक सदस्य को नौकरी दे। मेडिकल का जो भी बिल आएगा वो विभाग वहन करेगा। अभी तक शव को लेकर परिजन विरोध कर रहे हैं। भंवर सिंह भाटी एसएसबी में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत थे।
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