भारत-चीन बॉर्डर पर उत्तराखंड के चमोली में चट्टान गिरने से बनी झील , आपदा की दस्तक तो नहीं!

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उत्तराखंड में एक बार फिर आपदा की कोई आहट तो नहीं होने वाली है? भारत-चीन बॉर्डर पर गदेरे के ऊपर चट्टान गिरन से एक झील बन गई है। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए आईटीबीपी और वन विभाग की टीम को मौके लिए रवाना किया गया है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से टीम को मौके पर पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

उच्च हिमालयी इलाकों में बसे ग्रामीण शीतकालीन प्रवास के लिए नदी घाटी इलाके में आने लगे हैं। चमोली जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को सतर्क रहने की भी हिदायत दी गई है। भारत-चीन बॉर्डर इलाके से लगे  नीती मलारी घाटी के तमक ( सेगडी नाले ) गांखुई गाढ़ के ऊपर चट्टान गिरने से नदी का जल प्रवाह रुक गया है। नदी का जल प्रवाह रुकने की वजह से एक झील बन गई है। जिला अधिकारी हिमांशु खुराना ने बताया कि आईटीबीपी-वन विभाग की टीम को भेजा गया है। कठिन रास्तों की वजह से अब मौके पर पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशने में जुटी हुई है।

भारी बारीश के बाद भूस्खलन की वजह से रास्ता बंद होने की वजह से टीम को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चमोली जिले के कोषा गरपक के ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह राणा ने बताया घटना तीन दिन पूर्व है। बताया जिस क्षेत्र में गदेरे में चट्टान आने से झील बनी है । 2003 से पहले भी वहां पर लोंग गांव के ग्रामीण निवास करते थे । पर 2003 में भूस्खलन   होने से ग्रामीणों का विस्थापन तमक और लोंग में ही किया गया। सूत्रों के अनुसार इलाके ऊपरी जल गृहण क्षेत्र में हिमनद के कटाव के कारण जल प्रवाह रुका है।

पहले भी बनी बन चुकी है झील
चमोली के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह बुटोला ने बताया 2017 में तमग गदेरे में मलबा आने से धौली गंगा में झील बन गई थी। लेकिन, राहत की बात रही थी कि उस समय कोई नुकसान नहीं हुआ था । तमक  जेलम में धौली गंगा पर विद्युत परियोजना का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को गया था  पर 7 फरवरी 2021 को ऋषि गंगा रैणी आपदा के बाद यहां पर विद्युत परियोजना बनाने  योजना को रोका गया था।

 

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