जयपुर.
राजस्थान चुनाव के लिए अब एक दिन शेष है। भाजपा के स्टार प्रचारक आज राजस्थान में अलग-अलग दौरे करने में जुटे हुए हैं। आज गुरुवार को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन भी है, ऐसे में केंद्रीय मंत्री अमित शाह भी जयपुर पहुंचे हुए हैं। यहां शाह ने प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। साथ ही भाजपा की केंद्र सरकार की योजनाओं का बखान भी किया। मैं विगत छह महीनों से राजस्थान में दौरा कर रहा हूं। मैं विश्वास के साथ बता सकता हूं कि पूरे राजस्थान में जनता ने परिवर्तन का मूड बनाया हुआ है।
राजस्थान ने हमेशा मोदी जी के साथ खड़े रहकर भाजपा का स्वागत किया है। परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति का कांग्रेस सरकार ने जो परिचय दिया है उससे जनता बहुत दुखी है। वहीं भाजपा सरकार की केंद्र की योजनाओं से लोग खुश हैं। इस बार राजस्थान की जनता जादूगर बनकर कांग्रेस सरकार को गायब करने वाली है। शाह ने कहा कि मैं पिछले काफी समय से कांग्रेस सरकार से एक सवाल पूछ रहा हूं, लेकिन कांग्रेस ने कभी जवाब नहीं दिया। मैंने उनसे कई बार पूछा कि, जब आपकी सरकार केंद्र में थी तब आपने राजस्थान के लिए क्या किया। मैं राजस्थान की जनता को बताना चाहता हूं कि 2004 से 2014 तक दो लाख करोड़ रुपया राजस्थान सरकार ने कांग्रेस को दिया था। मतलब दस साल में दो लाख करोड़ दिया। वहीं, भाजपा ने नौ साल में आठ लाख 70 हजार करोड़ रुपया राजस्थान को दिया है। इसके साथ-साथ 7 लाख करोड़ के काम केंद्रीय प्रोजेक्ट के रूप में किए हैं, जैसे नेशनल हाईवे, रेलवे स्टेशनों का अपग्रेडेशन, नई रेलवे लाइन बिछाई, छह हजार करोड़ से कोटा में नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनाने जैसे काम किए हैं।
महिलाओं और दलितों की सबसे खराब स्थिति
राजस्थान सरकार के पांच साल के दौरान सबसे खराब स्थिति अगर किसी की रही है तो महिलाओं और दलितों की रही है। गहलोत सरकार में तुष्टीकरण की राजनीति चरम पर है। वोट बैंक पॉलिटिक्स के कारण सुनियोजित ढंग से दंगाइयों पर राजस्थान सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं की गई। उदयपुर में कन्हैयालाल, भीलवाड़ा में आदर्श, चित्तौड़गढ़ में रतन सोनी, झालावाड़ कुष्टा वाल्मीकि, जयपुर में मनु वैष्णव ऐसे ढेर सारे हत्या केसों में तुष्टीकरण के कारण कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
लाल डायरी भ्रष्टाचार का प्रतीक
कांग्रेस की लाल डायरी भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गई है। दीपावली में जो डायरियां बांटी जाती हैं उसमें भी इस बार लोग लाल रंग से बच रहे थे। सबको लगाता है कि शुभ कार्य में दी जाने वाली डायरी का रंग लाल न हो, क्योंकि ये तो भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गई है। इस बार लाल रंग की डायरी की डिमांड कम हो गई।
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