नई दिल्ली
इजरायल और हमास के बीच जारी जंग के दौरान मिडल ईस्ट में भारतीय उड़ानों के जीपीएस सिग्नल खोने को लेकर उड्डयन निदेशालय चिंतित है। इसे लेकर निदेशालय ने सभी भारतीय एयरलाइंस को एडवाइजरी जारी की है। पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई रिपोर्ट्स आई हैं, जब मध्य पूर्व देशों के ऊपर से उड़ते हुए भारतीय विमानों के जीपीएस सिग्नल ही गायब हो गए। इसको लेकर उड्डयन निदेशालय अलर्ट है और इसमें किसी खतरे की आहट भी देखी जा रही है। फिलहाल इस बात पर मंथन हो रहा है कि इससे कैसे निपटा जाए।
उड्डयन निदेशालय ने इसे लेकर एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है, 'एविएशन इंडस्ट्री इन दिनों एक अनिश्चितता से गुजर रही है। नया खतरा देखा जा रहा है क्योंकि ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जाम हो जा रहा है या फिर सिग्नल खो जाते हैं।' पिछले कुछ समय में मिडल ईस्ट में सिग्नल खोने की समस्या में तेजी से इजाफा हुआ है। यही नहीं उड्डयन निदेशालय तो थ्रेट मॉनिटरिंग एंड एनालिसिस नेटवर्क बनाने पर विचार कर रहा है। सितंबर के आखिरी दिनों में ईरान के ऊपर से उड़ान भरते समय कई फ्लाइट्स का कनेक्शन खो गया था।
यही नहीं ईरान के ऊपर से ही गुजरते वक्त एक विमान का जब कनेक्शन खो गया तो वह बिना परमिशन के ही काफी देर तक उड़ता रहा। प्रोफेशनल पायलट्स, डिस्पैचर्स, शेड्यूलर्स और कंट्रोलर्स के संगठन ऑप्सग्रुप ने इन घटनाओं की जानकारी साझा की है। मिडल ईस्ट में उड़ान भरते हुए सिग्नल गायब होने से कई बार विमानों को यह भी अंदाजा नहीं लग पाता कि वहां चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में वह अपने तय रूट पर ही अंदाजन आगे बढ़ते हैं। जीपीएस सिग्नल में स्पूफिंग के जरिए कई बार हैकर सिस्टम में दिक्कत पैदा कर देते हैं।
ऐसी स्थिति में कई बार विमान चालकों को यह आभास होता है कि वे अपने तय रूट से अलग चल रहे हैं। उत्तरी इराक और अजरबैजान के बिजी एयरवे को देखते हुए जीपीएस कनेक्शन का खोना चिंता की बात है। 20 नवंबर को तुर्की के अंकारा शहर के जीपीएस कनेक्शन खोने की घटना सामने आई थी। इसके अलावा सितंबर से अब तक ऐसी 12 घटनाएं हो चुकी हैं। अब तक यह पता नहीं चल सका है कि इस स्पूफिंग के पीछे कौन है। हालांकि जानकार मानते हैं कि इलाके में युद्ध के चलते कुछ सेनाओं के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से भी ऐसा हो सकता है।
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