संघ के करीबी मोहन यादव, तीन बार के विधायक… जानें कौन हैं मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

मध्य प्रदेश में सोमवार को सीएम के नाम के चयन के लिए बीजेपी की विधायक दल की बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में विधायकों ने मोहन यादव के नाम पर मुहर लगाई है. मोहन यादव (Mohan Yadav) उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं. वह शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) सरकार में शिक्षा मंत्री रहे हैं. उन्होंने लगातार तीसरी बार विधायकी का चुनाव जीता है.

मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं. उन्हें संघ का करीबी माना जाता है. वह शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री थे. वह 2013 में पहली बार विधायक बने थे. इसके बाद 2018 में उन्होंने दूसरी बार उज्जैन दक्षिण सीट से चुनाव जीता. मार्च 2020 में शिवराज सरकार के दोबारा बनने के बाद जुलाई में उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया था. दो जुलाई 2020 को शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट में मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद सूबे की राजनीति में उनका कद बढ़ा.

उनका जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था. वह कई सालों से बीजेपी के साथ थे. इसके साथ ही वह लगातार तीसरी बार विधायक बने. उन्होंने बीजेपी के मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिण सीट से कांग्रेस के चेतन प्रेम नारायण को 12941 वोटों से हराया था.

कौन हैं मोहन यादव?

मोहन यादव ने छात्र नेता के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रख दिया था. वह 1982 में माधव साइंस कॉलेज के ज्वॉइंट सेक्रेटरी रहे. इसके बाद 1984 में वह अध्यक्ष बने. 1984 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) उज्जैन के नगर मंत्री पद तक पहुंचे.

बाद में 1988 में उन्हें एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया. वह 1989-90 तक परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री बने. इसी तरह सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए वह 1991-1992 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री पद तक पहुंच गए.

वह 1993-1995 में आरएसएस (उज्जैन) शाखा के सहखंड कार्यवाह बने. 1997 में भाजयुमो की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने. बाद में 1998 में पश्चिमी रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य बन गए. 1999 में उन्हें भाजयुमो के उज्जैन संभाग का प्रभारी बनाया गया.

साल 2000-2003 में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की कार्यपरिषद के सदस्य बने. 2000-2003 में उन्हें भाजपा का नगर जिला महामंत्री बनाया गया. 2004 में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने. बाद में 2004 से 2010 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद तक पहुंचे. साल 2008 से भारत स्काउट एंड गाइड के जिलाध्यक्ष बने. 2011-2013 में मध्य प्रधेश राज्य पर्यटन विकास निगम बने.

इसके अलावा उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया है. उन्हें उज्जैन के समग्र विकास हेतु अप्रवासी भारतीय संगठन शिकागो (अमेरिका) की ओर से महात्मा गांधी पुरस्कार, इस्कॉन इंटरनेशनल फाउंडेशन की ओर से सम्मान और मध्य प्रदेश में पर्यटन के निरंतर विकास हेतु पुरस्कार से नवाजा गया है.

मोहन यादव ने 2023 में चुनाव आयोग कि दिए हलफनामे में बताया है कि उनके पास 42 करोड़ से अधिक की संपत्ति है. इसमें से लगभग 10 करोड़ की चल और 32 करोड़ की अचल संपत्ति है. उनके ऊपर एक भी क्रिमिनल केस दर्ज नहीं है.

बता दें कि मोहन यादव के पास एलएलबी और पीएचडी जैसे डिग्रियां हैं. उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं जिनमें दो बेटे और एक बेटी शामिल है.

शिवराज के पांव छूकर लिया आशीर्वाद
विधायक दल की बैठक में जब डॉ.मोहन यादव के नाम का एलान किया गया तो मंच पर वह पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के पांव छूते देखे गए और शिवराज सिंह ने आत्मीयता के साथ सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया. मोहन यादव मध्य प्रदेश में बीजेपी का बड़ा ओबीसी चेहरा हैं. उनके नाम की घोषणा संभवतः 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए की गई है. मोहन यादव की शैक्षणिक योग्यता पीएचडी है. वह 2020 में उन्हें शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी और 2023 तक वह इस पद पर रहे. इससे पहले वह

अब तक का राजनीतिक करियर
58 वर्षीय मोहन यादव का राजनीतिक करियर एक तरह से 1984 में शुरू हुआ जब उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को ज्वाइन किया. वह आरएसएस के भी सदस्य हैं. उन्होंने 2013 में उज्जैन दक्षिण से चुनाव लड़ा था और लगातार तीसरे चुनाव में यहां से विधायक निर्वाचित हुए हैं. इस बार उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी चेतन प्रेमनारायण यादव को 12941 वोटों से हराया था. मोहन यादव को 95699 वोट मिले थे.

बीजेपी के अनुभवी नेता हैं डॉ.मोहन यादव
मोहन यादव के नाम की घोषणा उज्जैनवासियों के लिए सरप्राइज से कम नहीं है क्योंकि सीएम पद की रेस में इनका नाम कहीं नहीं था, लेकिन विधायक दल की बैठक में उनके नाम की घोषणा की गई.  वह  2004 से पहले 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे हैं जबकि 2011 से 2013 तक एमपी राज्य पर्यटन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है.

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