मोहन यादव को असर कर गया अयोध्या के नेपाली बाबा का आशीर्वाद! 2016 में हुई थी मुलाकात

मध्य प्रदेश राज्य

अयोध्या

डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने जब उनके नाम का ऐलान किया तो हर कोई हैरान रह गया। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में मोहन यादव का ससुराल है। यहां भी किसी के लिए यकीन कर पाना मुश्किल था कि मोहन यादव शिक्षामंत्री से सीधे मुख्यमंत्री बन गए। हालांकि, कई लोगों का मानना है कि इसके पीछे अयोध्या के नेपाली बाबा का आशीर्वाद है, जिन्होंने उज्जैन के महाकुंभ के दौरान साल 2016 में ही मोहन यादव के सीएम बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। मोहन यादव नेपाली बाबा के शिष्य हैं। सिंहस्थ कुंभ में बाबा की ओर से आयोजित राम नाम जप महायज्ञ में मुख्य यजमान भी रह चुके हैं।

कौन हैं नेपाली बाबा

नेपाली बाबा उर्फ आत्मानंद दास स्वामी उत्तर प्रदेश के अयोध्या में रहते हैं। यहां उन्होंने रामघाट में सीताराम आश्रम की स्थापना की है। राजनीति में वह भाजपा के समर्थक माने जाते हैं। मोहन यादव के सीएम बनने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए उन्होंने बधाई दी है। इस पोस्ट में मोहन यादव को उन्होंने अपना परम शिष्य बताया है। नेपाली बाबा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी कट्टर समर्थक हैं। उन्होंने हाल ही में मोदी को राम का अवतार और योगी आदित्यनाथ को लक्ष्मण बताया था। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में आने वाले 50 लाख संतों को भोजन कराने के ऐलान के कारण भी वह हाल में चर्चा में रहे हैं।
 

कैसे पड़ा नाम नेपाली बाबा

आत्मानंद दास स्वामी उर्फ नेपाली बाबा के नाम से ऐसा आभास होता है कि उनका नेपाल से कोई संबंध है। हालांकि, ऐसा नहीं है। वह अयोध्या के रहने वाले हैं। एक इंटरव्यू में नेपाली बाबा ने साफ किया था कि वह नेपाल के नहीं बल्कि अयोध्या के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में जहां भगवान राम ने शिवधनुष तोड़ा था, उस जगह को धनुष धाम कहते हैं। यहां उन्होंने एक आश्रम बनाया है। उन्होंने बताया कि आश्रम की स्थापना के बाद जब वह नेपाल से जाने लगे तो स्थानीय लोगों ने उनसे अनुरोध किया कि वह यहां से न जाएं। जा भी रहे हैं तो नेपाल को अपने साथ लेकर जाएं और अपने नाम के साथ इसे जोड़ लें। इसके बाद से उनका नाम नेपाली बाबा हो गया।

शाही स्नान नहीं करते, खर्चों को लेकर चर्चे

नेपाली बाबा अन्य संतों से कई मामलों में अलग हैं। कुंभ या अर्द्धकुंभ के अवसरों पर जहां सारे संत शाही स्नान करते हैं, वहीं नेपाली बाब को इससे परहेज है। वह पेशवाई की रस्म में भी दिलचस्पी नहीं रखते। वह भंडारों के लिए अपने खर्चों को लेकर भी काफी चर्चा में रहते हैं। उज्जैन के कुंभ में नेपाली बाबा ने 80 हजार लोगों को फ्री खाना खिलवाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंहस्थ कुंभ में मंगलनाथ क्षेत्र में अपने विशाल शिविर पर उन्होंने तकरीबन 25 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसी दौरान एक अनुष्ठान में मोहन यादव भी मुख्य यजमान बने थे। तभी नेपाली बाबा ने उन्हें प्रदेश का सीएम बनने का आशीर्वाद दिया था।

 

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