प. बंगाल सरकार ने कोविड-19 से हालात की समीक्षा की

देश

ओडिशा में फरवरी में होगा विश्व उड़िया भाषा सम्मेलन का आयोजन

पहला विश्व उड़िया भाषा सम्मेलन फरवरी में आयोजित किया जाएगा

भुवनेश्वर
 ओडिशा सरकार ने राज्य में और इससे बाहर उड़िया भाषा का प्रचार करने और इसे मजबूत तथा अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए अगले साल फरवरी में एक विश्व उड़िया सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में धरोहर कैबिनेट की बैठक में ‘विश्व उड़िया भाषा सम्मेलन’ के आयोजन का निर्णय लिया गया।

राज्य में उड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अश्विनी पात्रा ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ”यह सम्मेलन तीन दिवसीय होगा और इसकी तिथि बाद में निर्धारित की जाएगी।”

मुख्य सचिव पी. के. जेना ने संवाददाताओं से कहा कि यह पहली बार है कि राज्य सरकार ने इस तरह का सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इसका आयोजन बड़े स्तर पर होगा और इसमें उड़िया भाषा के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विद्वान, लेखक, शिक्षक और छात्र भाग लेंगे।

जेना ने कहा कि तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान इससे संबंधित कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित होगी।

प. बंगाल सरकार ने कोविड-19 से हालात की समीक्षा की

कोलकाता
 पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य में कोविड-19 की स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

देश में कोरोना वायरस के नए स्वरूप 'जेएन.1' का पहला मामला सामने आने के बाद केंद्र ने राज्यों से सतर्कता बरतने का आग्रह किया था, जिसके बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने  यहां कोविड-19 से हालात की समीक्षा बैठक की।

अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ कोविड-19 समीक्षा बैठक में भाग लेगा।

अधिकारी ने बताया, ''पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के नए स्वरूप 'जेएन.1' का एक भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, हम किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे के साथ तैयार है।”

उन्होंने कहा, बेलेघाटा आईडी अस्पताल और एमआर बांगुर अस्पताल में 'आइसोलेशन वार्ड' तैयार हैं।

अधिकारी ने कहा, ''स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के बाद दोनों अस्पतालों में जायजा लिया गया साथ ही सीसीयू, आईसीयू बेड और मेडिकल-ऑक्सीजन आपूर्ति पाइपलाइन का भी जायजा लिया गया।''

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने  राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक पत्र भेजा था, जिसमें कोरोना वायरस के नए स्वरूप 'जेएन.1' के पहले मामले का पता चलने के बाद आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया था।

 

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