नई दिल्ली
देश की राजधानी दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ना शुरू हो गई है. उत्तर भारत में नए साल पर मौसम ने करवट बदली और शीतलहर का प्रकोप भी शुरू हो गया. मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में ठंड का प्रकोप बढ़ सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि उत्तर भारत में ही हाड़कंपाती ठंड क्यों पड़ती है? वहीं, कड़ाके की सर्दी में मुंह से भाप निकलने के पीछे का विज्ञान भी काफी दिलचस्प है.
देश के कई राज्यों में शीतलहर का प्रकोप जारी है. लोग कपड़ों पर कपड़े पहनने के बाद भी कांपते हुए नजर आ रहे हैं. देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले उत्तर भारत के राज्यों में ज्यादा ठंड पड़ने की एक वजह धरती का भूगोल भी है. दरअसल, उत्तर भारत के इलाके पृथ्वी की अक्षांश रेखा के नजदीक हैं. अक्षांश रेखा ही तय करती है कि किसी क्षेत्र में मौसम कैसा रहेगा. भारत की ज्यादातर भूमि उत्तरी गोलार्द्ध में है. लिहाजा, इन इलाकों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी होती है.
जलवायु परिवर्तन कड़ाके की ठंड के लिए जिम्मेदार
कड़ाके की ठंड के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, अब सर्दी ही नहीं हर मौसम चरम पर पहुंच रहा है. अगर ठंड पड़ रही है तो लोगों की हालत खराब कर रही है. गर्मी में भी लोगों का बुरा हाल बन रहा है. बारिश तो तबाही मचा रही है. विकास की दौड़ में हम इतना प्रदूषण फैला रहे हैं कि पर्यावरण का ख्याल करना भूल जा रहे हैं. इसी प्रदूषण के कारण मौसम अपने चरम पर पहुंच रहे हैं. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, अगर समय रहते ग्लोबल वार्मिंग को थामने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात बदतर होते जाएंगे.
धरती से सूरज की दूरी बढ़ने पर पड़ती है ठंड
सर्दियों के मौसम में सूर्य और धरती के बीच की दूरी बढ़ जाती है. इससे भी धरती के बड़े हिस्से में ठंड और बर्फीली हवाएं चलती हैं. बता दें कि धरती सूर्य के चारों ओर वृत्ताकार नहीं, बल्कि परवलयाकार कक्षा में चक्कर लगाती है. ऐसे में हर वक्त धरती से सूर्य की दूरी समान नहीं रहती है. परवलयाकार पथ पर चक्कर लगाने के क्रम में जब पृथ्वी सूर्य से दूर चली जाती है, तो धरती पर सर्दियां शुरू हो जाती हैं. दूरी और बढ़ने पर कड़ाके की ठंड पड़ना शुरू हो जाती है.
पश्चिमी विक्षोभ बर्फबारी के लिए है जिम्मेदार
उत्तर भारत में कड़कड़ाती ठंड पड़ने की बड़ी वजह पश्चिमी विक्षोभ भी है. बता दें कि पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर और अटलांटिक महासागर से नमी लेकर उत्तर भारत पहुंचता है. जब ये नम हवाएं उत्तर भारत में हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से टकराती हैं तो सर्दी में बर्फबारी या बारिश करती हैं. कई जगह ओलावृष्टि भी होती है. इसके बाद हिमालय से चलने वाली बर्फीली हवाएं पूरे उत्तर भारत में हाड़कंपाती ठंड का कारण बनती हैं. अब जानते हैं कि सर्दियों में मुंह से भाप निकलने के पीछे का विज्ञान क्या है?
सर्दी में मुंह से क्यों निकलती है भाप?
जब हम सांस लेते हैं तो शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनता है. इस प्रक्रिया में बना पानी जलवाष्प के रूप में फेफड़ों की वाष्पीकरण प्रक्रिया के बाद मुंह या नाक के जरिये शरीर से बाहर आता है. हमारे शरीर का औसत तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट माना जाता है. कड़ाके की सर्दी में जब हम सांस छोड़ते हैं तो साथ में शरीर का पानी भी बाहर आता है. जब यह पानी वातावरण की ठंडी हवा से मिलता है तो इसका वाष्पीकरण शुरू होता है. यह जलवाष्प बाहर की ठंडी हवा से मिलने पर घनी होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है. इसी वजह से हमारे मुंह और नाक से सर्दियों में भाप निकलती है.
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