नई दिल्ली
अयोध्या में विवादित स्थल की पहली और दूसरी खुदाई के दौरान ASI के अधिकारी रहे केके मोहम्मद का कहना है कि मुसलमानों को ज्ञानवापी और मथुरा की शाही ईदगाह को हिंदुओं को सौंप देनी चाहिए।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नॉर्थ जोन के रीजनल डायरेक्टर रहे केके मोहम्मद ने कहा कि विवाद का एक मात्र समाधान इन स्थलों को हिंदुओं को सौंप देना ही है। इसको लेकर सभी धर्मगुरुओं को एकत्रित हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम, शिव और श्रीकृष्ण के साथ हिंदुओं की भावना जुड़ी हुई है। वहीं मुस्लिमों की कोई भावना यहां से नहीं जुड़ी है। मुस्लिमों की भावना से मक्का औऱ मदीना जुड़ा है।
पहली खुदाई में ही मिल गए थे मंदिर के स्तंभ
अयोध्या में पहली बार जब खुदाई हुई तभी यहां से 12 स्तंभ मिले थे। उनमें से कई स्तंभों पर हिंदू निशान बने हुए थे। उस समय केके मोहम्मद बीबी लाल की टीम में ट्रेनी के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीबी लाल नहीं चाहते थे कि ये बातें सामने आएं और कोई विवाद पैदा हो। इसलिए इसका प्रकाशन नहीं करवाना चाहते थे। लेकिन बाद में कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने कहा कि खुदाई में कुछ भी नहीं मिला। इसके बाद प्रोफेसर बीबी लाल को जवाब देना पड़ा और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सच बता दिया।
केके मोहम्मद ने कहा कि 1992 में जब बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया तो यह सुनकर भी मैं हैरान रह गया था। उन्होंने कहा कि एक पुरातत्ववेत्ता के रूप में मैं कभी किसी भी संरचना को नष्ट करने का समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इस बात की खुशी है कि खुदाई के बाद जो निष्कर्ष दिए गए उशके परिणामस्वरूप राम मंदिर बन गया है और भगवान राम विराजमान हो रहे हैं।
मिलती रहती हैं धमकियां
बात दें कि केके मोहम्मद को 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया गया था। हालांकि वह समारोह में नहीं गए। उनका कहना है कि बीमारी के चलते वह फिट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आज भी कई बार उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ता है। वह केरल के कोझिकोड में रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने विवाद स्थल की खुदाई में मिले परिणाम के बारे में बताया था तब से ही उनको धमकियां मिलने लगीं।
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