कोलकाता
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली इलाके में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार के मामले में सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को ममता सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने दो टूक कहा है कि यदि किसी नागरिक की सुरक्षा को खतरा है तो फिर 100 फीसदी जिम्मेदारी सत्ताधारी दल की है। रिपोर्ट के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि संदेशखाली में जो कुछ भी हुआ, वह पूरी तरह से शर्मनाक है। वहां जो कुछ भी हुआ उसकी नैतिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सत्ताधारी दल की है। कोर्ट ने बंगाल सरकार से आगे कहा, ''अगर किसी नागरिक की सुरक्षा खतरे में है तो 100 फीसदी जिम्मेदारी सत्तारूढ़ दल की है।''
कलकत्ता हाई कोर्ट संदेशखाली से जुड़े जनहित मामले की सुनवाई कर रहा था। मुख्य न्यायाधीश शिवज्ञानम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने इस मामले में दायर कुल पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने सख्त लहजे में शाहजहां के वकील से सवाल भी किए। उन्होंने कहा, ''आप एक आरोपी शख्स की ओर से सवाल पूछ रहे हैं। पहले अपने आसपास के साए से छुटकारा पाएं। उसके बाद दूसरे के बारे में बात करें।''
बता दें कि पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में स्थित संदेशखाली इलाके की कई महिलाओं ने दो महीने पहले तृणमूल कांग्रेस के तत्कालीन नेता शाहजहां शेख समेत अन्य पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद बीजेपी, कांग्रेस नेताओं ने टीएमसी सरकार पर जबरदस्त हमला बोला। कई महीनों तक बीजेपी और कांग्रेस टीएमसी पर हमलावर रहे। इसके बाद शाहजहां शेख को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में शेख को टीएमसी से बाहर कर दिया गया।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने संदेशखाली मामले की पीड़िता रेखा पात्रा को बशीरहाट सीट से उम्मीदवार भी बनाया है। इसके बाद कुछ जगह पर रेखा पात्रा के खिलाफ पोस्टर भी लगे दिखाई पड़े थे। वहीं, पीएम मोदी ने संदेशखाली पीड़िता रेखा पात्रा से फोन पर बातचीत भी की थी। इस दौरान उन्होंने उनसे चुनावी तैयारियों, लोगों के बीच भाजपा के प्रति समर्थन और अन्य मुद्दों की जानकारी ली। रेखा पात्रा ने संदेशखाली में महिलाओं की ओर से सामना की जाने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया। इस दौरान पीएम मोदी ने रेखा पात्रा को शक्ति स्वरूपा बताया।
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