पुलिस बनी रही मूकदर्शक, पाकिस्तान में बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ग्रिड स्टेशन में धावा बोलकर खुद बहाल की सप्लाई

दुनिया

पेशावर.

पाकिस्तान में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। यहां के सिंध प्रांत के मोहनजोदड़ो और दादू में गुरुवार को तापमान 50 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। वहीं, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत समेत कई अन्य जगहों का तापमान 46 डिग्री से अधिक रहा। चिलचिलाती गर्मी और ऊपर से बार-बार बिजली का जाना यहां के लोगों के लिए आफत बन गया है।

शनिवार को बिजली की कटौती से लोगों का गुस्सा भड़क गया और एक ग्रिड स्टेशन पर धावा बोल दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा के निवासियों का गुस्सा तब भड़क गया, जब शनिवार को बहुत लंबे समय तक बिजली नहीं आई। बिजली नहीं आने का कारण लोडशेडिंग बताया गया। जब लोगों से गर्मी सहन नहीं हुई तो सभी हजारा खावग्रिड स्टेशन पहुंच गए और बिजली बहाल करने के लिए अपने हाथों में कमान ली।

ग्रिड स्टेशन में घुसे लोग
मौके पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद लोग ग्रिड स्टेशन में घुस गए। बता दें, पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) के सांसद फजल इलाही के नेतृत्व में विरोध-प्रदर्शन किया गया। इलाही ने कहा कि अगर हमारे क्षेत्र में बिजली कटौती की जाएगी, तो सभी की बिजली काट दी जाएगी।

इन जगहों की भी बिजली चालू की
वहीं पेशावर इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (पेस्को) के अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने याका टुट, हजार खवानी, अखुनाबाद और न्यूचमकानी सहित नौ हाई-लॉस फीडरों को जबरन चालू कर दिया, जहां बिजली चोरी और बकाया राशि का भुगतान न करने के कारण नुकसान 80 प्रतिशत से अधिक है।

यह है लोडशेडिंग का कारण
इसके अलावा लोडशेडिंग के कारण लाहौर निवासी भी बिजली कटौती से जूझ रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में दिन के दौरान हर घंटे एक घंटे के लिए लगातार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। लाहौर में बिजली की मांग 4200 मेगावाट है, जबकि कोटा 4000 मेगावाट है। दरअसल, सब्जाजर ग्रिड स्टेशन पर आग लगने से स्थिति और खराब हो गई है, जिससे अन्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है।

15 मई को भी किया था लोगों ने विरोध
इससे पहले 15 मई को डेरा इस्माइल खान के स्वाबी में छोटा लाहौर तहसील की महिलाओं और निवासियों ने दिन में 20 घंटे से अधिक समय तक बिजली कटौती के विरोध में सड़कों को अवरुद्ध कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने उन राजनीतिक नेताओं के प्रति अपनी निराशा व्यक्त की, जिन्होंने चुनाव अभियानों के दौरान वादे किए थे, लेकिन जीतने के बाद बिजली की समस्या का समाधान करने में विफल रहे। उन्होंने इन प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराने और भविष्य के चुनावों में उन्हें वोट नहीं देने की कसम खाई।

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