रांची.
झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दायर जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि सोरेन को कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। 31 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार किया था। सोरेन ने सोमवार को उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करते हुए शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से अदालत में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय की पीठ के समक्ष दलील दी कि जेएमएम नेता राजनीतिक साजिश का शिकार हुए हैं। सिब्बल ने आगे कहा कि हेमंत सोरेन को बिना किसी सबूत के मामले में फंसाया गया है।
अदालत ने ईडी को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए
अदालत ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय से अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि 10 जून को इस मामले पर फिर से सुनवाई की जाएगी। बता दें कि हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया गया था कि वह रांची में एक भूखंड के लिए जमीन के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने में शामिल थे। 31 जनवरी को अपनी गिरफ्तारी से पहले जेएमएम नेता ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वह रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।
हेमंत सोरेन ने याचिका में क्या कहा?
झारखंड के पूर्व सीएम ने अपनी याचिका में कहा है कि 8.5 एकड़ जमीन से जुड़े किसी भी दस्तावेज में उनका नाम शामिल नहीं है। हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कोई अपराध नहीं बनता। उन्होंने दावा किया कि ईडी द्वारा केवल कुछ लोगों के बयानों पर भरोसा किया गया है।
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