कर्नाटक
कर्नाटक के गृह मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने राज्य के पिछड़ा वर्ग और दलित समुदाय से किसी सांसद को मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं करने को लेकर सोमवार को राजग सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि सरकार गठन की कवायद में इन समुदायों की ‘‘अनदेखी'' की गई। परमेश्वर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि वे (भाजपा/राजग) पिछड़े वर्गों और दलित समुदायों को नहीं चाहते हैं। इन समुदायों से ऐसे कई लोग हैं जो राज्य में उस पार्टी से चुने गए हैं।''
कर्नाटक से पांच सांसद मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने
पार्टी की प्रदेश इकाई के पूर्व प्रमुख ने कहा, ‘‘वे उनके नामों पर विचार कर सकते थे लेकिन यह उनके विवेकाधिकार पर निर्भर करता है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इन समुदायों की अनदेखी की गई।'' कर्नाटक से पांच सांसद, रविवार को शपथ लेने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की मंत्रिपरिषद का हिस्सा हैं। भाजपा की निर्मला सीतारमण (राज्यसभा) और प्रह्लाद जोशी तथा जनता दल (सेक्युलर) के एच डी कुमारस्वामी ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली, जबकि भाजपा की शोभा करंदलाजे ने वी सोमन्ना के साथ राज्य मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
28 सीट में से 19 पर राजग ने जीत दर्ज की
सीतारमण और जोशी ब्राह्मण जाति से हैं, जबकि कुमारस्वामी और करंदलाजे प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। सोमन्ना राज्य के एक अन्य प्रभावशाली समुदाय-लिंगायत से हैं। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीट में से 19 पर राजग ने जीत दर्ज की, जिनमें भाजपा ने 17 और जद(एस) ने 2 सीट जीती। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने 9 सीट हासिल की। यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस में समुदायों के आधार पर और भी उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने के बारे में चर्चा हुई है, परमेश्वर ने कहा, ‘‘ऐसी कोई बात नहीं है, ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है। महज इसलिए कि कोई बोल रहा है, यह पार्टी का मुद्दा नहीं हो सकता।'' उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जो भी फैसला करेगा, वह अंतिम होगा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि इस तरह के कदम उठाने की जरूरत है, तो वे फैसला करेंगे। सिद्धरमैया सरकार में वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डी. के. शिवकुमार एकमात्र उपमुख्यमंत्री हैं।
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