भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, मेक्सिको, अमेरिका और यूरोप में गर्मी से हजारो मौतें

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नई दिल्ली

भारत के कई राज्यों में भीषण गर्मी का जारी है। बीते दिनों दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था। यह संकट भारत में ही नहीं है बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों समेत पूरे विश्व में ही प्रचंड गर्मी देखी जा रही है। एशिया से यूरोप तक 4 महाद्वीपों में इस साल भीषण गर्मी पड़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरी दुनिया के तापमान का औसत देखा जाए तो यह बीते 2000 सालों का रिकॉर्ड टूटने जैसा है। हालात ऐसे हैं कि सऊदी अरब में चल रही हज यात्रा में ही 1000 से ज्यादा लोगों की गर्मी के चलते मौत हो गई है।

इनमें करीब 100 लोग भारत के ही रहने वाले थे। इसके अलावा करीब 50 लोग पाकिस्तान के थे। सऊदी अरब के मक्का में इस सप्ताह करीब 20 लाख लोग हज यात्रा कर रहे हैं। लेकिन इस दौरान 1000 से ज्यादा लोगों की हीटस्ट्रोक के चलते मौत हो गई। मक्का में लगातार तापमान 52 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक 10 देशों में 1081 लोगों की मौत गर्मी के चलते हुई है। भूमध्यसागर के देशों में बीते सप्ताह से भीषण गर्मी का दौर जारी है। इसके चलते पुर्तगाल से ग्रीस तक जंगलों में आग लगने की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है।

सर्बिया में तो डॉक्टरों का कहना है कि हार्ट और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों की संख्या में 109 गुना का इजाफा हुआ है। यूरोप में भी गर्मी का खूब असर दिख रहा है। यहां गर्मी के चलते पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। अमेरिका में करीब 8 करोड़ लोगों को अलर्ट जारी किया गया है। कई राज्य भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इसके अलावा पड़ोसी देश मेक्सिको में भी गर्मी से बुरा हाल है। न्यूयॉर्क में तो पहली बार कूलिंग सेंटर खोले जा रहे हैं ताकि लोगों को चिलचिलाती गर्मी से कुछ राहत दी जा सके। ऐरिजोना में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। आमतौर पर यहां इतना तापमान नहीं हुआ करता।

मेक्सिको, अमेरिका और यूरोप में गर्मी से तमाम मौतें

इस साल मेक्सिको में गर्मी से अब तक 125 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 2300 से ज्यादा लोगों को हीटस्ट्रोक के चलते बीमार होना पड़ा है। यूरोपियन यूनियन की क्लाइमेट मॉनिटरिंग सर्विस का कहना है कि बीते 12 महीनों का यदि डेटा देखा जाए तो ऐसी गर्मी कभी नहीं पड़ी थी। फिलहाल वैज्ञानिक इस बात का भी अध्ययन कर रहे हैं कि इतनी भीषण गर्मी की वजह ग्लोबल वार्मिंग ही है या इसकी कुछ और वजह है। बता दें कि कार्बन उत्सर्जन को भी गर्मी बढ़ने की एक बड़ी वजह माना जाता है।

 

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