लंदन.
ब्रिटेन में 4 जुलाई को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी हैं। ब्रिटेन में भारतीय मूल के और हिंदू मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या को देखते हुए लेबर पार्टी इस वर्ग को लुभाने में जुटी है। यही वजह है कि लेबर पार्टी ने एलान किया है कि अगर वे सत्ता में आए तो वे देश से भारत-विरोधी भावना को खत्म करने की कोशिश करेंगे। साथ ही भारत के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध बनाने की भी पैरवी की।
लेबर पार्टी ने पूर्व में जेरेमी कोर्बिन के नेतृत्व में एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का समर्थन किया गया था। पार्टी को लगता है कि इससे भारतीय मूल के मतदाता लेबर पार्टी से दूर हो गए और 2019 के आम चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ा। लेबर पार्टी के कुछ सांसदों द्वारा खालिस्तान समर्थक विचारों का समर्थन करने का भी पार्टी को भारी पड़ा। लेबर पार्टी की नेता एनीलीस डोड्स ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी वर्ग के वोटों को हल्के में नहीं ले रही है और हर वोट पाने के लिए मेहनत कर रही है। उन्होंने कहा कि 'अगर देश में भारत विरोधी आंदोलन का कोई सबूत मिला तो यकीनन वे इसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।'
कंजर्वेटिव पार्टी भी भारतीय मूल के लोगों को लुभाने में जुटी
लेबर पार्टी के नेता कीर स्टर्मर ने हाल ही में ब्रिटेन में एक हिंदू मंदिर का भी दौरा किया और भारतीय मूल के लोगों की चिंताओं को दूर करने का वादा भी किया। हालांकि सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी भी भारतीय मूल के मतदाताओं को अपने पाले में रखने के लिए पूरा जोर लगा रही है। पार्टी की नेता और सुनक सरकार में मंत्री फैलिसिटी बुचन ने कहा कि उनकी पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड भारत समर्थित रहा है। 'भारत के साथ रिश्तों को हम बेहद अहमियत देते हैं।' उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में भारतीय मूल के करीब 18 लाख लोग रहते हैं और 4 जुलाई के चुनाव में इनकी भूमिका अहम रहेगी।
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