उत्तर रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे में लिया गया निर्णय, अब लोको पायलट और गार्ड को ड्यूटी में नहीं ढोने पड़ेंगे लोहे के संदूक

देश

नई दिल्ली
लोको पायलट और गार्ड को अब अपना निजी सामान और आधिकारिक उपकरण लोहे के ट्रंक में नहीं ले जाने पड़ेंगे। वे इसके स्थान पर ट्राली बैग का उपयोग कर सकेंगे। इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने अपने सभी जोन को पत्र लिखा है। इस पत्र में लोको पायलट और गार्ड को ट्रॉली बैग उपलब्ध कराने को कहा गया है।

चर्चा के बाद जारी किया जाएगा निर्देश
बोर्ड ने 19 जुलाई को लिखे अपने पत्र में कहा है कि जोनल रेलवे से अनुरोध है कि वे लोको पायलट (ट्रेन चालक) और गार्ड को ट्रॉली बैग उपलब्ध कराने के नीतिगत निर्णय को लागू करना शुरू करें। बोर्ड ने 2006 में एक व्यापक निर्देश के साथ इसकी शुरुआत की थी। एक साल बाद परीक्षण के आधार पर इसके कार्यान्वयन के लिए ट्रेड यूनियन के साथ चर्चा के बाद एक और दिशा निर्देश जारी किया। हालांकि, लोको पायलट और गार्ड के कड़े विरोध के कारण इसे अगले 11 वर्षों तक लागू करने की प्रक्रिया जारी रही। 2018 में बोर्ड ने एक बार फिर इस योजना को परीक्षण के लिए दो क्षेत्रों उत्तर रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

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