अयोध्या
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को अयोध्या के दौरे पर थे। सीएम ने यहां ब्रह्मलीन महंत परमहंस रामचंद्र दास महाराज की 21वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने इस अवसर पर उनकी दिव्य एवं भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। सीएम ने कार्यक्रम में मौजूद साधु-संतों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पूज्य संत, ब्रह्मलीन महंत परमहंस रामचंद्र दास महाराज मेरे लिए पूज्य गुरु के तुल्य थे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारत की न्यायपालिका की ताकत दुनिया ने देखी। लोग कहते थे कि अगर फैसला राम मंदिर के पक्ष में हुआ तो सड़कों पर खून की नदियां बहेंगी। योगी ने कहा, साधु-संतों ने भरपूर प्रयास किया कि बातचीत से समस्या का समाधान निकालेंगे। लेकिन, जब बातचीत से समस्या का समाधान नहीं हुआ और हठधर्मिता आड़े आने लगी तो साधु संतों ने लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष का रास्ता चुना। इस रास्ते को चुनने के बाद देश में बड़ी मजबूती के साथ आंदोलन हुए। आंदोलन के बढ़ने के कारण मामला न्यायालय में जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन और यूपी में भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार बनने के बाद समस्या का समाधान भी हुआ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास और भूमि पूजन कार्य संपन्न किया। 22 जनवरी 2024 को 500 वर्षों का इंतजार खत्म करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की। दुनिया भर में यह तारीख प्रेरणा भी बनी।
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि सनातन आस्था के केंद्र धर्मनगरी श्री अयोध्या धाम में आज प्रभु श्री रामलला के दर्शन-पूजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रभु श्री राम की कृपा ही जीवन का आधार है। उनके आशीर्वाद से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों।
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