मऊगंज में ब्राह्मण की शिखा उखाड़ने के मामले में पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, थाना प्रभारी और एक कॉन्सटेबल को हटाया गया

मध्य प्रदेश राज्य

रीवा
 एमपी के मऊगंज जिले में एक युवक ने शाहपुर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक का कहना है कि पुलिस ने उसके साथ मारपीट की। यही नहीं उसकी शिखा उखाड़ी और जनेऊ भी तोड़ा है। हालांकि, एसपी रचना ठाकुर ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि युवक उस वक्त शराब के नशे में था और सड़क जाम कर रहा था।

मामला 6 सितंबर का बताया जा रहा है। शाहपुर में एक सड़क हादसे में आशीष साकेत नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मृतक के शव को सड़क पर रखकर लोग चक्का जाम कर रहे थे। इसी चक्का जाम का नेतृत्व नरेंद्र मिश्रा नामक युवक कर रहा था। पुलिस ने बताया कि नरेंद्र मिश्रा शराब के नशे में था। इस दौरान कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
ब्राह्मण समाज की आपत्ति के बाद गरमाया मामला

नरेंद्र मिश्रा ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसके साथ मारपीट की गई। उसकी शिखा उखाड़ी गई और जनेऊ तोड़ा गया। इस मामले ने तूल पकड़ा तो ब्राह्मण समाज के लोगों ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की।
इसलिए युवक पर दर्ज हुआ केस

इस मामले में एसपी रचना ठाकुर ने सफाई देते हुए कहा कि युवक ने जो भी आरोप लगाए है वो सभी निराधार हैं। उसके साथ शिखा उखाड़ने जैसी कोई घटना नहीं हुई है। सड़क हादसे के घटना वाले दिन युवक सड़क जाम का नेतृत्व कर रहा था। इसी के चलते उस पर मामला दर्ज हुआ था। उस दिन वो शराब के नशे में था जिसकी मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई थी। उन्होंने कहा कि युवक द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच एडिशनल एसपी को सौंपी गई है। उसका दोबारा मेडिकल भी कराया गया है।
पुलिस अधिकारी और कॉन्सटेबल को हटाया

एसपी ने कहा कि जो चोटें है वो 24 घंटे पूर्व की बताई जा रही हैं। मेडिकल में शिखा उखाड़ने जैसी कोई बात नही आई है। शिखा उखाड़ने का आरोप निराधार है ऐसी कोई घटना सीसीटीवी मे भी नही पाई गई है। हालांकि जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए थाना प्रभारी और एक आरक्षक को लाइन अटैच कर दिया गया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस स्टेशन प्रभारी वीसी बिश्वास और एक कांस्टेबल को सक्रिय ड्यूटी से हटा दिया गया है।

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