केकड़ी/अजमेर.
किसी भी खेल में खिलाड़ी जान लड़ाकर प्रतिद्वंदियों से मुकाबले में अपने कौशल से मैच जीतकर आगे बढ़ता है और अपनी प्रतिभा से अगले चरण के लिए सेलेक्ट किया जाता है। पर यदि प्रतिभावान खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर, ऐसे खिलाड़ियों का सिलेक्शन कर लिया जाए, जिन्होनें पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं खेला हो, तो इसे चयन समिति की करामात ही कहा जायेगा, जिस पर अचंभा होना स्वाभाविक है।
मामला केकड़ी जिले का है, यहां शिक्षा विभाग द्वारा जिले के ग्राम बघेरा में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के संयोजन में 17 से 19 वर्ष आयुवर्ग के छात्रों के लिए 68वीं जिला स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। टूर्नामेंट सम्पन्न होने के साथ ही राज्य स्तर पर चयन किये गए कुछ खिलाड़ियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाया गया है कि कुछ खिलाड़ी छात्रों ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं खेला और उनका राज्य स्तर पर खेलने के लिए चयन कर लिया गया। अन्य खिलाड़ी छात्रों द्वारा इसकी शिकायत करने पर उनसे कहा गया कि 'बस निकल गई, पीछे वाली बस में आना, टिकट कटवा दूंगा।' आज इस गड़बड़झाले की शिकायत अब जिला कलेक्टर तक पहुंचाई गई है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय टोडारायसिंह के खिलाड़ी छात्रों ने जिला कलक्टर को लिखित शिकायत देते हुए बताया कि यह टूर्नामेंट 12 सितंबर तक चला था। इसमें चयन समिति द्वारा राज्य स्तर पर खेलने के लिए जिला टीम का चयन करते समय उपविजेता रही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय टोडारायसिंह के तीन छात्रों का चयन किया गया।
बाद में चयन समिति के शारीरिक शिक्षकों द्वारा मिलीभगत कर अपने चहेतों को उपकृत करते हुए दो ऐसे खिलाड़ियों का चयन कर लिया गया, जिन्होने कोई मैच खेला ही नहीं, क्योकि वे एक्स्ट्रा में रहे थे। जो खिलाड़ी शुरू से लेकर फाइनल मैच तक नहीं खेले, उनका चयन कर लिया गया और जिन खिलाड़ियों ने टीम को मैच जिताया, उनको नजरअंदाज कर दिया गया। ज्ञापन में जिला कलक्टर से गुहार की गई है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी छात्रों को न्याय दिलाएं व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें।
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