जयराम महतो ने धनबाद, सिंदरी, टुंडी और बोकारो को छोड़कर 14 अन्य सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की

राज्य

धनबाद
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेलकेएम) ने विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्यशियों की दूसरी सूची जारी कर दी है। गुरुवार को धनबाद परिसदन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेता जयराम महतो ने धनबाद, सिंदरी, टुंडी और बोकारो को छोड़कर 14 अन्य सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। महतो ने बताया कि धनबाद से सपन मोदक, सिंदरी से उषा देवी, टुंडी से मोतीलाल महतो, बोकारो से सरोज कुमारी के अलावा मांडर से गुना भगत, राजधनवार से राजदेश रतन, कोडरमा से मनोज यादव, बरही से कृष्णा यादव, बरकट्ठा से महेंद्र मंडल को टिकट देने का एलान किया गया है।

इसके अलावा हजारीबाग से उदय मेहता, डालटनगंज से अनिकेत मेहता, गोड्डा से परिमल ठाकुर, गांडेय से अकील अख्तर उर्फ रिजवान और खरसावां से पांडु राम हिब्रू के नाम की घोषणा की गई है। महतो ने कहा कि दशहरा तक पार्टी अपने सभी प्रत्याशियों की सूची जारी कर देगी। राज्य के 70 सीटों पर इस बार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी प्रत्याशी दे रही है।

दो जगहों से चुनाव लड़ेंगे जयराम
जयराम महतो ने कहा कि वे दो सीटों से चुनाव लड़ेंगे। फिलहाल इस पर निर्णय अभी नहीं हुआ है। दूसरी सीट के लिए गोमिया, बेरमो या मांडू का चुनाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वे बाघमारा से भी चुनाव लड़ सकते हैं। यहां जुल्म और अन्याय की पराकाष्ठा हो चुकी है। इससे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) ने झारखंड की 81 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया था। इसके बाद पार्टी की ओर से बीते हफ्ते 6 उम्मीदवारों की सूची भी जारी की गई थी। जयराम महतो ने इस संबंध में मीडिया से बात करते हुए बताया था कि चुनाव मैदान में उतरने के लिए पार्टी के पास 69 आवेदन आए थे। संसदीय बोर्ड की सात सदस्यीय टीम ने उम्मीदवारों की पहली सूची के लिए 6 नामों को अपनी मंजूरी दी थी।

पहली सूची में थे ये नाम
डुमरी से जयराम महतो, जमुआ से रोहित कुमार दास, राजमहल से मोतीलाल सरकार, तमाड़ से दमयंती मुंडा, सरायकेला से प्रेम मार्डी और छतरपुर से प्रीति राज मैदान में उतरेंगे।

घुसपैठ बड़ा मुद्दा, रोजगार का भी संकट
बीते हफ्ते प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करते हुए जयराम महतो ने प्रदेश के मुद्दों को उठाने की बात कही थी। उन्होंने घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बताया था। उन्होंने कहा था कि इसकी वजह से पहाड़िया जनजाति के लोग परेशान हैं। आदिवासियों पर अत्याचार किया जा रहा है। जयराम ने विस्थापन को भी प्रदेश के लिए एक बड़ी समस्या बताया था। उनका कहना था कि स्थानीय नीति के बाद भी बेरोजगारी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मजदूरों के हक की लड़ाई के लिए तैयार है।

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