हरिद्वार में डीएम के आदेश पर तोड़ी गई अवैध धार्मिक संरचना, सिंचाई विभाग की जमीन पर था कब्जा

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हरिद्वार के रानीपुर कोतवाली में टिहरी बांध परियोजना पुनर्निवास मंडल ऋषिकेश सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध रूप से मजार नुमा धार्मिक संरचना बनाया गया था. जिसे शनिवार को डीएम के आदेश पर गिरा दिया गया. जिस वक्त मजार नुमा अवैध इमारत को गिराया, उस वक्त बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात थी. साथ ही मौके पर विभाग के बड़े अधिकारी भी मौजूद थे.

अवैध मजार नुमा धार्मिक संरचना को गिराए जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें देखा जा सकता है कि बुलडोजर इमारत को तोड़ रहा है. जबकि आसपास पुलिस फोर्स भी तैनात है. अवैध मजार नुमा संरचना को गिराने का आदेश डीएम हरिद्वार कर्मेन्द्र सिंह की तरफ से दिया गया है.

आदेश के बाद एसडीएम अजयवीर सिंह ने नेतृत्व में अवैध निर्माण पर कार्रवाई की गई है. आपको बता दें कि देश में बुलडोजर एक्शन चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट में इस केस की चार बार सुनवाई हो चुकी है. अब फैसला आने की बारी है. इन चार सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने काफी कुछ साफ कर दिया है और बुलडोजर एक्शन को लेकर टिप्पणियों के जरिए लकीर खींच दी है.

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा, फैसला आने तक किसी दोषी या आरोपी की संपत्तियां गिराने पर रोक जारी रहेगी. यह आदेश उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां अनधिकृत निर्माण हटाने के लिए ऐसी ध्वस्तीकरण कार्रवाई की जरूरत है. यानी सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे मामलों में बुलडोजर एक्शन जारी रहेगा. इस तरह की कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की सूचना के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल होना चाहिए. साथ ही उस कार्रवाई की वीडियोग्राफी करानी चाहिए. SC ने बुलडोजर एक्शन को लेकर गाइडलाइन बनाने के भी निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना था कि किसी केस में कोई आरोपी हो या दोषी… उसके घर या संपत्ति में तोड़फोड़ नहीं की जा सकती है.

यानी आरोपी या दोषी होना बुलडोजर चलाने का आधार नहीं हो सकता है. इतना ही नहीं, अवैध निर्माण साबित होने पर भी वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए. यानी तुरंत बुलडोजर लेकर पहुंचना और तोड़फोड़ करना संवैधानिक नहीं है.

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