केरल
केरल पुलिस ने केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी के खिलाफ एंबुलेंस के दुरुपयोग के आरोप में केस दर्ज कर लिया है। उनपर आरोप है कि पूरम महोत्सव मं व्यवधान की खबर सुनेन के बाद वह एंबुलेंस से वहां पहुंचे थे। त्रिशूर पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और मोटर वीइकल एक्ट की धारा 179, 288, 192 के तहत केस दर्ज किया है। एफआईआर में कहा गया है कि जिस वाहन का इस्तेमाल केवल मरीजों के लिए होना चाहिए, केंद्रीय मंत्री ने उसका इस्तेमाल निजी यात्रा के लिए किया है। उनके खिलाफ सीपीआई नेता सुमेश केपी ने शिकायत की थी।
राज्य में विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगयाा था कि त्रिशूर लोकसभा सीट से प्रत्याशी रहे बीजेपी के सुरेश गोपी के लिए ही महोत्सव में बवाल हुआ था। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की थी। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि उन्हें वहां से कुछ युवाओं ने बचाकर उस एंबुलेंस में बिठा दिया, जो संकट में फंसे लोगों की सेवा के लिए महोत्सव स्थल पर मौजूद थी। उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में और कुछ बताने की जरूरत नहीं है। सीबीआई को आकर जांच करने दीजिए। क्या उनमें सीबीआई से जांच कराने की हिम्मत है। अगर ऐसा हुआ तो उनकी पूरी राजनीति जलकर भस्म हो जाएगी। आप चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए, तो सीबीआई से जांच कराएं।”
गोपी ने इससे पहले भाजपा नेताओँ समेत कुछ अन्य लोगों के दावों का खंडन किया था कि वह समारोह स्थल पर एंबुलेंस से पहुंचे थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के यह कहने के बाद कि पूरम और अन्य अनुष्ठान बाधित नहीं हुए थे, त्रिशूर पूरम व्यवधान विवाद ने राज्य में राजनीतिक बहस शुरू कर दी है। केरल के लोक निर्माण मंत्री पी. ए. मोहम्मद रियास ने सीबीआई जांच की गोपी की चुनौती को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के बयान "केवल फिल्मों के लिए उपयुक्त हैं"। उन्होंने कोच्चि में संवाददाताओं से कहा, "हम जानते हैं कि सीबीआई और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल किस तरह से खास एजेंडे के लिए किया जाता है। उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को 'पिंजरे में बंद तोता' कहा था।"
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