बभ्रुवाहन महाराज बोले- संस्कृति और संस्कार ही भारत की पहचान, छत्तीसगढ़-सूरजपुर में विवेकानंद जयंती पर हिंदू सम्मेलन

छत्तीसगढ़ रायपुर

सूरजपुर।

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले स्थित नगर पंचायत जरही में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बभ्रुवाहन जी महाराज, मुख्य वक्ता चंद्रशेखर वर्मा कार्यकारी अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद, प्रांत छत्तीसगढ़, और धर्म जागरण प्रांत प्रमुख राजकुमार चंद्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता पुरन राम राजवाड़े व आभार दिनेश पांडेय ने किया।

कार्यक्रम की शुभारंभ भारत माता के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित व पुष्प अर्पित करने के पश्चात उपस्थित अतिथियों को शॉल एवं श्रीफल प्रदान कर सम्मान कर किया गया। ततपश्चात धर्मजागरण प्रांत प्रमुख राजकुमार चंद्रा ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा स्वामी विवेकानंद जी युवा शक्ति के प्रतीक हैं। युवाओं को चरित्र निर्माण और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। धर्मांतरण एक बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए समाज को जागरूक होना होगा। हर हिंदू परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए, ताकि समाज और धर्म को संरक्षित किया जा सके। वहीं बभ्रुवाहन जी महाराज ने कहा कि संस्कृति और संस्कार ही भारत की पहचान हैं। गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनः अपनाने से बच्चों में नैतिकता और संस्कार विकसित होंगे। परिवार और समाज को मिलकर सनातन धर्म के मूल्यों को बनाए रखना होगा। वही चंद्रशेखर वर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपने भाषण से विश्व को भारत के ज्ञान और संस्कृति से परिचित कराया। धर्मांतरण खत्म करना है तो पहले जातिवाद को समाप्त कर हिंदू समाज को संगठित होना होगा। हमें स्वामी विवेकानंद का नारा ‘गर्व से कहो, हम हिंदू हैं’ को आत्मसात करना चाहिए। सम्मेलन में वक्ताओं ने हिंदू समाज को संगठित रहने, धर्मांतरण रोकने और युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में दिनेश पांडेय, लाल साय सिहं पावले, देवपाल पैकरा, मुकेश सिहं, विकेश जायसवाल सहित अन्य लोग सक्रिय रहे।

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