पटना
प्रदेश सरकार की जमीन या सरकारी आवास पर अवैध तरीके से कब्जा करने वालों से अब सख्ती से निपटा जाएगा। ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्ती करते हुए अवैध कब्जे के एवज में उनसे 10 हजार रुपये का जुर्माना और छह महीने की जेल तक की सजा हो सकेगा। नीतीश सरकार ने पहले मंत्रिमंडल इसके बाद विधानमंडल से पारित बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखली) अधिनियम 2024 को लागू कर दिया है। इस संबंध में गजट अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
सबसे पहले 1956 में बना था ये कानून
बिहार सरकारी परिसर अधिनियम 1956 में बना था और इसमें बीच-बीच में कई संशोधन भी किए गए, लेकिन बदलते वक्त के साथ सरकारी आवास, परिसर या जमीन पर कब्जे की प्रवृति बदली है साथ ही बढ़ी भी है। परंतु पुराने कानून में ऐसे कानूनी उल्लंघन पर सजा के लिए कोई प्रमुचित प्रविधान नहीं थे। जिसे देखते हुए पुरानी अधिनियम में कई नए संशोधन करते हुए नए अधिनियम में ऐसे मामलों से निपटने की व्यवस्था की गई है।
सख्ती से निपटेगी सरकार
भवन निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी मकान, भवन, जमीन का आवंटन सरकार के स्तर पर होता है। कई बाद आवंटन की अवधि समाप्त होने के बाद भी इन आवास पर कब्जा जारी रहता है। विभाग से मांगने पर किराया तक का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है। अब ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा।
पहले नोटिस जारी करेगा विभाग
ऐसे किसी भी कब्जे की सूचना मिलने पर विभाग नोटिस जारी कर संबंधित आवंटी अथवा कब्जाधारी से जवाब तलब करेगा। उसे आवास, जमीन वगैरह खाली करने को कहेगा। नोटिस के बाद भी बात नहीं बनती है तो संबंधित व्यक्ति को छह महीने की साधारण कारावास से लेकर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भी वसूला जाएगा। या फिर जेल और जुर्माना दोनों की सजा दी जा सकेगा।
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