जयपुर,
न्यायिक प्रकरणों के कारण माइंस विभाग की बकाया राशि की वसूली को लेकर राज्य सरकार गंभीर होने के साथ ही प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण को लेकर कवायद तेज कर दी है। प्रमुख सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम श्री टी. रविकान्त ने कहा है कि माइंस विभाग से संबंधित 10 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया राशि के न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों में राजकीय पक्ष को प्रभावी तरीके से रखने के लिए कवायद तेज कर दी है।
उन्होंने बताया कि 10 करोड़ से अधिक के न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के गुणावगुण के आधार पर अध्ययन कर समीक्षा करने के लिए अतिरिक्त निदेशक माइंस मुख्यालय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है। राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी में वित्तीय सलाहकार माइंस विभाग, संयुक्त विधि परामर्शी उदयपुर व जयपुर के साथ ही जयपुर, कोटा, उदयपुर और जोधपुर के अतिरिक्त निदेशक माइंस को सदस्य बनाया गया है। एक मोटे अनुमान के अनुसार 10 करोड़ रूपये और इससे अधिक के 50 से अधिक विचाराधीन प्रकरणों में राज्य सरकार की हजारों करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं।
श्री टी. रविकान्त ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा राजकीय बकाया राशि को लेकर गंभीर होने के साथ ही समय समय पर बकाया राशि की वसूली में तेजी लाने और न्यायिक प्रकरणों में विभागीय पक्ष को कारगर तरीके से रखने के निर्देश देते रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह समिति 10 करोड़ व इससे अधिक बकाया राशि के सभी प्रकरणों की गुणावगुण के आधार पर परीक्षण करेगी और उन प्रकरणों में न्यायालयों में प्रभावी पेरवी के लिए आवश्यक सुझाव देते हुए अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रेषित करेगी।
उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों व प्रकरणों में ओआईसी अधिकारियों को भी स्टे प्रकरणों में स्टे हटवाने और अन्य प्रकरणों में राज्य सरकार का पक्ष प्रभावी तरीके से रखते हुए निर्णित कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को निर्णित करवा कर राज्य सरकार की बकाया रेवेन्यू की वसूली की जा सके। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों में समय पर जबाव दावा पेश किया जाए और पेशी के समय उपस्थित होकर सरकारी पक्ष को रखते हुए निर्णित करवाये जाये।
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