बड़वानी के रहने वाले अमर बघेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 592वीं रैंक हासिल की है

मध्य प्रदेश राज्य

बड़वानी/धार
संघ लोक सेवा आयोग  की सिविल सेवा परीक्षा 2024 का फाइनल रिजल्ट (Final Result) मंगलवार यानी 22 अप्रैल की दोपहर में घोषित कर दिया गया। इसी बीच मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में धार के यतीश अग्रवाल ने अपने सपने को साकार करते हुए जिले का नाम रोशन किया है। वहीं बड़वानी के रहने वाले अमर बघेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 592वीं रैंक हासिल की है।

 बड़वानी के रहने वाले अमर बघेल ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 592वीं रैंक हासिल की है। यह अमर का पांचवां प्रयास था, जिसमें उन्होंने सफलता प्राप्त की। अमर बघेल ने बताया कि वे वर्ष 2020 से यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। 2023 में उनका चयन ईपीएफओ (EPFO) विभाग में अकाउंटेंट पद के लिए हुआ था। इस दौरान वे नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी भी करते रहे। वहीं अब उन्हें उम्मीद है कि उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या आयकर विभाग (IRS) में हो सकता है। अमर की सफलता की खबर सुनते ही उनके परिवार और पूरे शहर में खुशी की लहर दौड़ गई।

बता दें कि, अमर की पढ़ाई बड़वानी में हुई है। उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई बड़वानी से पूरी कर आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईएएस बनने के लिए उन्होंने आठ महीने दिल्ली में कोचिंग की, जिसके बाद इंदौर में रहकर तैयारी जारी रखी। अमर बघेल के पिता रुमाल सिंह बघेल सिंचाई विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। उनके बड़े भाई दीपक बघेल ने भी वन विभाग की परीक्षा दी। जिसमें उनका चयन रेंजर के लिए हुआ।

यतीश ने की 761वीं रैंक हासिल

इधर धार जिले के धामनोद नगर के निवासी यतीश अग्रवाल ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC में सफलता हासिल की है। मंगलवार को घोषित हुए UPSC के फाइनल परिणामों में यतीश ने 761वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। इस सफलता के बाद उनके घर में जश्न का माहौल है। परिजनों, मित्रों और नगरवासियों ने मिठाई खिलाकर उन्हें बधाइयां दीं। यतीश ने इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी दादी को दिया है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनकी दादी ने उन्हें संस्कृत भाषा से जोड़ा, जिससे इस विषय के प्रति उनकी गहरी रुचि बनी। यतीश ने पिछले ढाई वर्षों से UPSC की तैयारी की, जिसमें उन्होंने स्व-अध्ययन के साथ-साथ ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया। कठिन परिश्रम, निरंतर अभ्यास से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।

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