शासकीय स्कूल पर हो रहा बेखौफ कब्जा, विभाग बना अनजान, जांच की उठ रही मांग

मध्य प्रदेश राज्य

मंडला
 लालीपुर चौराहे स्थित एक बंद प्राथमिक शाला भवन पर बेखौफ तरीके से अतिक्रमण कर लिया गया है। कभी बच्चों के पढ़ाई, खेल और प्रार्थना स्थल रहे इस भवन के मुख्य द्वार पर अवैध रूप से कब्जा कर वहां गेट और सीटें लगा दी गई हैं। अब स्थिति यह है कि शासकीय भवन में प्रवेश के लिए पहले कब्जाधारी से अनुमति लेनी पड़ती है।
       जानकारी अनुसार यह भवन वर्तमान में जिला शिक्षा केंद्र के अधीन है और विभागीय जानकारी के अनुसार इसे गोदाम के रूप में उपयोग किया जा रहा है। बताया जाता है कि तकनीकी कारणों से यह शाला कुछ वर्ष पूर्व बंद कर दी गई थी। लेकिन विभाग की अनदेखी का लाभ उठाकर अब यह भवन निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है। कुछ लोगों का कहना है कि उक्त जगह मंदिर ट्रस्ट की है, जिससे कब्जा करने वाला खरीद कर वहां निर्माण कार्य कराया है, अब दो प्रकार के सवालों का जबाब जांच उपरांत ही मिल सकता है।
       इस मामले में जब एसडीईओ से चर्चा की गई तो उन्होंने कब्जे की जानकारी से अनभिज्ञता जताई और कहा कि जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह उठता है कि यदि विभाग सतर्क होता तो यह कब्जा संभव ही नहीं था।
         वर्तमान में शहर में आंगनबाड़ी केंद्र सहित कई शासकीय कार्यालयों के लिए भवनों की आवश्यकता है। यदि यह भवन ऐसे किसी कार्य को सौंप दिया जाता, तो आज यह स्थिति न बनती।
          यह मामला न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर संबंधित विभाग कितने गंभीर हैं। अब देखना यह है कि विभाग अवैध कब्जा हटाने में कितनी तत्परता दिखाता है या इसे भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

इनका कहना है-
आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है, जांच उपरांत मामला  सही पाए जाने पर कब्जा हटाने की वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।

बीईओ, मण्डला

 लालीपुर चौराहे स्थित एक बंद प्राथमिक शाला भवन पर बेखौफ तरीके से अतिक्रमण कर लिया गया है। कभी बच्चों के पढ़ाई, खेल और प्रार्थना स्थल रहे इस भवन के मुख्य द्वार पर अवैध रूप से कब्जा कर वहां गेट और सीटें लगा दी गई हैं। अब स्थिति यह है कि शासकीय भवन में प्रवेश के लिए पहले कब्जाधारी से अनुमति लेनी पड़ती है।
       जानकारी अनुसार यह भवन वर्तमान में जिला शिक्षा केंद्र के अधीन है और विभागीय जानकारी के अनुसार इसे गोदाम के रूप में उपयोग किया जा रहा है। बताया जाता है कि तकनीकी कारणों से यह शाला कुछ वर्ष पूर्व बंद कर दी गई थी। लेकिन विभाग की अनदेखी का लाभ उठाकर अब यह भवन निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है। कुछ लोगों का कहना है कि उक्त जगह मंदिर ट्रस्ट की है, जिससे कब्जा करने वाला खरीद कर वहां निर्माण कार्य कराया है, अब दो प्रकार के सवालों का जबाब जांच उपरांत ही मिल सकता है।
       इस मामले में जब एसडीईओ से चर्चा की गई तो उन्होंने कब्जे की जानकारी से अनभिज्ञता जताई और कहा कि जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह उठता है कि यदि विभाग सतर्क होता तो यह कब्जा संभव ही नहीं था।
         वर्तमान में शहर में आंगनबाड़ी केंद्र सहित कई शासकीय कार्यालयों के लिए भवनों की आवश्यकता है। यदि यह भवन ऐसे किसी कार्य को सौंप दिया जाता, तो आज यह स्थिति न बनती।
          यह मामला न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर संबंधित विभाग कितने गंभीर हैं। अब देखना यह है कि विभाग अवैध कब्जा हटाने में कितनी तत्परता दिखाता है या इसे भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

इनका कहना है-
आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है, जांच उपरांत मामला  सही पाए जाने पर कब्जा हटाने की वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।

बीईओ, मण्डला

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