पटना
अपनी प्रशासनिक सख्ती और बेबाक अंदाज के लिए मशहूर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी केके पाठक को शनिवार को बिहार राज्य सेवा से औपचारिक रूप से कार्यमुक्त कर दिया गया। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने उनकी सेवामुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी।
शराबबंदी कानून लागू कराने में निभाई थी निर्णायक भूमिका
1990 बैच के आईएएस अधिकारी पाठक अब केंद्र सरकार के तहत कैबिनेट सचिवालय में अतिरिक्त सचिव का पदभार संभालेंगे। अनुशासन, ईमानदारी और भ्रष्टाचार व लापरवाही के प्रति जीरो टॉलरेंस के रवैये के कारण उन्होंने बिहार में जबरदस्त ख्याति अर्जित की। उन्हें व्यापक रूप से उन चंद अधिकारियों में से एक माना जाता है, जिन्होंने अपने सख्त और निडर रवैये के जरिए बिहार की प्रशासनिक छवि को नया आकार देने के लिए अथक प्रयास किए। पाठक शराबबंदी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए जाने जाते हैं। शराबबंदी कानून को लागू कराने में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई थी। उन्होंने न केवल पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी को सख्त क्रियान्वयन के निर्देश दिए, बल्कि अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी 38 जिलों में औचक निरीक्षण भी किए।
स्कूलों में अनुशासन स्थापित करने के लिए लिए कई कड़े फैसले
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में केके पाठक ने शिक्षकों की लापरवाही पर अंकुश लगाने और स्कूलों में अनुशासन स्थापित करने के लिए कई कड़े फैसले लिए। स्कूलों के उनके अचानक निरीक्षण से अक्सर गलती करने वाले शिक्षक, प्रधानाध्यापक और शिक्षा अधिकारी पकड़े जाते थे, जिससे महत्वपूर्ण सुधार हुए। बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में अपर मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने भूमि विवाद समाधान और मापी कार्य में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाए। केके पाठक का केंद्र में तबादला उनकी प्रशासनिक सूझबूझ और ईमानदारी की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिवालय में अपर सचिव के पद पर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है। उनके जाने से बिहार ने अपने सबसे गतिशील और अनुशासित प्रशासकों में से एक को खो दिया है।
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