जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत इटौरा में भेड़ौरा नदी तथा उसके घाटों की साफ-सफाई की गई

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में स्वयं सेवी कार्यकर्ता और प्रशासनिक अमला संगठित होकर पानी बचाने के कार्य में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे है। राज्य के जिलों में इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे है। अभियान में प्राचीन धरोहर के तालाबों और बावड़ियों के संरक्षण का कार्य पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है।

भेड़ौरा नदी के पुनर्जीवन के लिए उठे सैकड़ों हाथ

रीवा जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत इटौरा में भेड़ौरा नदी तथा उसके घाटों की साफ-सफाई की गई। सीईओ जिला पंचायत तथा उपस्थित श्रमदानी नागरिकों ने नदी में उतर कर घाटों की सफाई की।  जन संवाद में बताया गया कि जल के सभी स्त्रोत जीवन सभ्यता के लिए अनिवार्य है। इनका संरक्षण करना समाज की जिम्मेदारी है। अभियान में नदियों, तालाबों, बावड़ियों, पोखरों व अन्य जल संरचनाओं का संरक्षण व संवर्धन किया जा रहा है।

जल विरासतों को सहजने का अभियान

राजगढ़ जिले की राजमहल एवं पुरानी बावड़ी अपने समृद्ध इतिहास को बयां करती हैं। जल संवर्धन अभियान अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा इन ऐतिहासिक बावड़ियों की साफ-सफाई कर इनके जीर्णोद्धार का कार्य हाथ में लिया गया है। जीर्णोद्धार के बाद ये बावड़ियां अपने समृद्ध इतिहास की जीवंत तस्वीर बन सकेंगी। जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग से सूचीकृत मोरपीपली की बावड़ी, माचलपुर की चोर बावड़ी, हाडीरानी की बावड़ी एवं सेमली जागीर की बावड़ी इसके अलावा नरसिंहगढ स्थित उम्मेदा बाई की बावड़ी एवं छतरी सहित राजगढ़ के राजमहल स्थित बावडी के जीर्णोद्धार का कार्य भी किया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले के नगरीय क्षेत्रों में जल संवर्धन अभियान अंतर्गत प्याऊ की स्थापना भी की जा रही है। इसमें प्रत्येक नगरीय क्षेत्र के हर वार्ड में एवं सार्वजनिक स्थानों पर 300 प्याऊ स्थापित करने का कार्यक्रम है। नदियों के कटाव को रोकने के लिए नगरीय क्षेत्रों में 5 एकड़ में हरित क्षेत्र भी जल संवर्धन अभियान के अंतर्गत तैयार किया जा रहा हैं। जिले में नगरीय क्षेत्रों में शासकीय एवं बड़े भवनों की रैन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं के सुधार का कार्य भी हाथ में लिया गया है, ताकि बरसात के सीजन में इन संरचनाओं से भूमिगत जल स्तर में वृद्धि हो सके। आमजन में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए सभी नगरीय क्षेत्रों में नल कनेक्शनों में आवश्यक रूप से टोंटी लगाने का कार्य भी अभियान के अंतर्गत किया जा रहा है। प्रत्येक नगरीय क्षेत्र में बाग-बगीचों का भी उन्नयन किया जा रहा है। यह बाग-बगीचे नगरीय वन के रूप में विकसित किये जाएंगे।

राजगढ़ जिले में 734 कूपों पर काम शुरू कर दिया गया है। विभाग द्वारा जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया गया। इसी क्रम में भारत सरकार के MY Bharat पोर्टल में जिले के कुल 90911 युवाओं का रजिस्ट्रेशन Youth Volunteer for Bharat में कराया गया। पोर्टल पर फोटोग्राफ अपलोड किये। जिले में कुल 68 नवीन तालाब का स्थल चयन कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है|

राजगढ़ जिले में 140 ग्राम पंचायतों में प्रभात फेरियां, जागरूकता रैली, ग्राम सभाएं एवं चौपाल तथा नुक्कड नाटकों का आयेाजन किया जा चुका है। इसी तरह जन सहभागिता से 64 ग्राम पंचायतों में 04 बोरी बंधान/चैक डेम, 43 सोख्ता गडडों तथा 62 अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही 158 ग्राम पंचायतों में नदियों, तालाबों एवं कुआ बावडि़यों की साफ-सफाई का कार्य किया गया है।

कदवाल नदी पर किया गया श्रमदान

श्योपुर जिले में कलेक्टर अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जल गंगा सवंर्धन अभियान चलाया जा रहा है। कदवाल नदी गुप्तेश्वर महादेव मंदिर घाट पर स्वच्छता श्रमदान किया गया और नदी के गहरीकरण कार्य की शुरूआत की गई। इसी के साथ 30 लाख रूपये लागत की बाउन्ड्री वॉल निर्माण कार्य के लिए भूमि-पूजन किया गया। नगरपालिका परिषद श्योपुर एवं ग्राम पंचायत बगवाज के तत्वाधान में गुप्तेश्वर महादेव मंदिर कदवाल नदी पर आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गुप्तेश्वर मंदिर के घाट पर साफ-सफाई की गई।

सुंदरदादर घाट मे 180 बोरियो का बोरी बंधान किया गया

उमरिया जिले में अपनी मिट्टी अपना जल को संरक्षित करने हेतु जन सहयोग के माध्यम से बोरी बंधान के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। सुंदरदादर के आमा घाट मे 180 बोरियो का बोरी बंधान किया गया।

ताप्ती नदी पर चलाया स्वच्छता अभियान

बैतूल जिले में  जल गंगा संवर्धन अभियान में लगातार गतिविधियाँ जारी है। वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना होगा। चुनौती नहीं,बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। ताप्ती नदी के घाटों की सफाई की गई तथा जल में फैली गंदगी,प्लास्टिक की बोतलें, कपड़ें, पन्नियां, थर्माकोल इत्यादि को समेट कर उचित निस्तारण किया गया। कार्यक्रम में मानव श्रृंखला बनाकर जल संरक्षण का संकल्प लिया गया।

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